वर्ष 2023 से 2026 के बीच प्रति लाभार्थी ₹1.50 लाख की सहायता जारी; कच्चे मकानों से निकलकर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे जरूरतमंद परिवार।
"अपना घर" हर व्यक्ति का सपना होता है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के इस सपने को साकार करने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है। हिमाचल प्रदेश सरकार की स्वर्ण जयंती आश्रय योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में आशा की नई किरण बनकर आई है।
इसके माध्यम से बेघर व कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को पक्का घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
प्रति लाभार्थी ₹1.50 लाख की आर्थिक मदद
जोगिंदर नगर क्षेत्र में वर्ष 2023 से 2026 के दौरान स्वर्ण जयंती आश्रय योजना के तहत 114 पात्र परिवारों को प्रति मकान 1.50 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई। इस मदद से कई परिवार जोखिम भरे कच्चे मकानों से निकलकर सम्मानजनक और सुरक्षित पक्के घरों में निवास कर रहे हैं।
लाभार्थियों के आंकड़े (वर्गवार विवरण)
तहसील कल्याण अधिकारी, जोगिंदर नगर के अनुसार इस अवधि में लाभान्वित 114 परिवारों का विवरण इस प्रकार है:
अनुसूचित जाति (SC): 109 परिवार
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 3 परिवार
अनुसूचित जनजाति (ST): 2 परिवार
लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
रण सिंह (ग्राम हारगुनैन): "हमारा परिवार पहले कच्चे मकान में रहता था। आर्थिक तंगी के कारण पक्का घर बनाना नामुमकिन था। सरकार से मिली 1.50 लाख रुपये की सहायता से अब हमारा अपना पक्का घर बन सका है। इसके लिए हम मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और राज्य सरकार के आभारी हैं।"
सुखदेव (ग्राम आरठी): "कच्चे मकान के संकट से निकालकर सरकार ने हमें पक्के घर में रहने योग्य बनाया है। राज्य सरकार गरीब वर्ग की बुनियादी जरूरतों को समझकर उनके जीवन स्तर को सुधारने का बेहतरीन कार्य कर रही है।"
सुरक्षा और सम्मान की नई शुरुआत
स्वर्ण जयंती आश्रय योजना केवल वित्तीय अनुदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को सुरक्षा, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य की नींव प्रदान करती है। प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता है कि राज्य का कोई भी पात्र गरीब परिवार अपने घर के सपने से वंचित न रहे।
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