सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया ऐतिहासिक, कहा- 11,973 मिलियन यूनिट बिजली से प्रदेश को हर साल करीब 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा
बीबीएमबी में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि करीब चार दशक की कानूनी लड़ाई के बाद प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से लेकर अब तक प्रदेश के हितों के लिए पैरवी करने वाली सभी सरकारों को दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ में हिस्सेदारी सहित प्रदेश के अन्य लंबित अधिकारों की लड़ाई भी जारी रहेगी।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि बीबीएमबी में हिमाचल की हिस्सेदारी का मामला वर्ष 1996 से कानूनी लड़ाई में था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोनिया गांधी के सहयोग और तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के समर्थन से इस लड़ाई की शुरुआत की थी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में भी सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के अधिकार को स्वीकार किया था, लेकिन बिजली की वास्तविक मात्रा और पिछली अवधि की बकाया ऊर्जा का निर्धारण नहीं हो पाया था।
अब नए फैसले के तहत प्रदेश को 20 वर्षों की अवधि में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। इससे हिमाचल को प्रतिवर्ष करीब 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ होने का अनुमान है। उन्होंने इसे कानूनी, राजनीतिक और नैतिक जीत बताते हुए कहा कि भाखड़ा-नंगल और पोंग बांध से विस्थापित परिवारों के अधिकारों की लड़ाई भी जारी रहेगी।
चंडीगढ़ में हिस्सेदारी का मामला भी उठाएगी सरकार
मंत्री ने कहा कि बीबीएमबी मामले में मिली कानूनी सफलता से हिमाचल को अपने अन्य लंबित अधिकारों की लड़ाई के लिए भी आधार मिला है। चंडीगढ़ में हिस्सेदारी का मामला प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पर जितना अधिकार दूसरे राज्यों का है, उतना ही हिमाचल का भी है। प्रदेश सरकार इस मुद्दे को हिमाचल हाईकोर्ट, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सहित हर उचित मंच पर उठाती रहेगी।
विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि प्रदेश में 800 किलोमीटर सड़कों के निर्माण और सुधार का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 50 से 60 प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है। आगामी विधानसभा सत्र में विधानसभा क्षेत्रवार पूरा ब्योरा रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि सड़कों के काम में देरी का एक प्रमुख कारण बिटुमेन की कमी है। इसके लिए केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय से लगातार संपर्क किया जा रहा है।
ऑफलाइन टेंडर के मुद्दे पर रणधीर शर्मा को जवाब
पांच लाख रुपये तक के छोटे टेंडर ऑफलाइन करवाने की व्यवस्था पर भाजपा विधायक रणधीर शर्मा के आरोपों का जवाब देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह व्यवस्था पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार के समय भी लागू थी।
उन्होंने कहा कि यदि इन टेंडरों में कहीं धांधली या अनियमितता का मामला सामने आता है तो सरकार कार्रवाई करेगी। विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनता के पैसे का हिसाब सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
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