ग्रेच्युटी और लीव इन्कैशमेंट सहित करोड़ों रुपये की देनदारियां लंबित, मांगें पूरी नहीं होने पर धर्मशाला में जुटेंगे हजारों पेंशनर
हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों की लंबित मांगों और वित्तीय देनदारियों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज होने जा रहा है। हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने 12 से 17 नवंबर तक प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देने का ऐलान किया है।
इसके बावजूद सरकार की ओर से वार्ता के लिए नहीं बुलाए जाने और मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं होने की स्थिति में 19 नवंबर को हजारों पेंशनर धर्मशाला पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे।
समिति के जिला समन्वयक हरमेश सिंह राणा ने बताया कि बिलासपुर में आयोजित स्टेट बॉडी की बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति तय की गई है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की कुछ मांगों पर सरकार ने राहत दी है। सरकार की ओर से 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी किया गया है, जिसके लिए समिति ने आभार जताया है।
इसके अलावा मेडिकल रिइंबर्समेंट के वर्षों से लंबित बिलों का भुगतान करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। अधिकांश विभागों में बजट मिलने के बाद इन बिलों का भुगतान हो चुका है।
राणा के अनुसार, 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पे-कमिशन रिवीजन का बकाया लगभग मिल चुका है। वहीं, क्लास-1 और क्लास-2 श्रेणी के कर्मचारियों को दो बार 15-15 प्रतिशत पेंशन एरियर दिया गया है। इसके बावजूद ग्रेच्युटी, लीव इन्कैशमेंट और अन्य वित्तीय देनदारियों का भुगतान अभी लंबित है। इन मदों में करोड़ों रुपये बकाया हैं।
800 पेंशनरों ने बकाया भुगतान के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
हरमेश सिंह राणा ने बताया कि करीब 800 लोगों ने लंबित वित्तीय देनदारियों के भुगतान के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने सरकार को दिसंबर और फरवरी तक दो किस्तों में बकाया राशि चुकाने के आदेश दिए हैं।
12 से 17 नवंबर तक जिला मुख्यालयों पर धरने
पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने आंदोलन के तहत 12 से 17 नवंबर तक प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरने देने का निर्णय लिया है। समिति का कहना है कि यदि इसके बाद भी सरकार ने वार्ता के लिए नहीं बुलाया और लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 19 नवंबर को हजारों पेंशनर धर्मशाला पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे।
समिति ने स्पष्ट किया है कि ग्रेच्युटी, लीव इन्कैशमेंट और अन्य लंबित वित्तीय देनदारियों सहित सभी मांगें पूरी होने तक पेंशनरों का संघर्ष जारी रहेगा।
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