छात्र राजनीति से विधानसभा अध्यक्ष तक का सफर, स्वास्थ्य मंत्री और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का अनुभव; 2027 के चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा में सक्रिय भूमिका पर चर्चा
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में कांगड़ा जिला हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इसी जिले से आने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता और सुलह विधानसभा क्षेत्र के विधायक विपिन सिंह परमार की राजनीतिक सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है।
30 अक्टूबर को धर्मशाला में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में उनकी भागीदारी ने प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक अभियानों में उनकी भूमिका को सामने रखा है।
धर्मशाला में आयोजित इस पदयात्रा में सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज के साथ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने भी नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम को भाजपा के प्रदेशव्यापी अभियान के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। इसके तहत शिमला, मंडी और हमीरपुर में भी पदयात्राओं का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
विपिन सिंह परमार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से छात्र राजनीति से की। इसके बाद युवा मोर्चा से लेकर जिला और प्रदेश भाजपा संगठन तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 1998 में वह पहली बार सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2007 और 2017 में भी विधानसभा पहुंचे।
वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया। इसके बाद 26 फरवरी 2020 को उन्होंने हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष का पद संभाला और दिसंबर 2022 तक इस संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन किया। वर्ष 2022 में उन्होंने एक बार फिर सुलह विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की।
स्वास्थ्य मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अनुभव
विपिन सिंह परमार के राजनीतिक सफर में स्वास्थ्य मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के पद महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाली।
वहीं विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर सदन की कार्यवाही का संचालन करने के साथ संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं के अनुरूप विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाई।
विधानसभा अध्यक्ष का पद एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस पद पर रहते हुए सदन की मर्यादा और विधायी प्रक्रियाओं से जुड़े अनुभव ने उनके राजनीतिक सफर को एक अलग पहचान दी।
कांगड़ा की राजनीति में संगठनात्मक भूमिका
कांगड़ा जिला प्रदेश की राजनीति में अपनी अहमियत रखता है। ऐसे में यहां संगठन को मजबूत बनाए रखना और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कायम रखना राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है। विपिन सिंह परमार का राजनीतिक आधार सुलह विधानसभा क्षेत्र में है, लेकिन उनका अनुभव जिला और प्रदेश स्तर की राजनीति तक फैला हुआ है।
प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी के साथ उनकी भूमिका केवल अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। धर्मशाला में आयोजित पदयात्रा में उनकी सक्रिय भागीदारी को इसी संगठनात्मक जिम्मेदारी के संदर्भ में देखा जा रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ीं राजनीतिक गतिविधियां
धर्मशाला से 30 अक्टूबर को शुरू हुए ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान के दौरान परमार ने निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), संवैधानिक संस्थाओं और कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को दस गारंटियों, रोजगार, आर्थिक स्थिति और विकास कार्यों के मुद्दों पर भी घेरा।
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने में जुटी है। ऐसे समय में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान विधायक विपिन सिंह परमार की भागीदारी उनके राजनीतिक अनुभव और संगठन में वर्तमान जिम्मेदारी को रेखांकित करती है।
छात्र राजनीति से शुरू होकर संगठन, सरकार और विधानसभा के शीर्ष संवैधानिक पद तक पहुंचे विपिन सिंह परमार का राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरा है। अब प्रदेश भाजपा के अभियानों में उनकी सक्रियता और कांगड़ा की राजनीति में उनकी भूमिका आने वाले समय में किस रूप में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।
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