भाजपा विधायक ने सीएम कार्यालय के निर्माण और फर्नीचर पर खर्च को लेकर उठाए सवाल, बोले- सरकार को आर्थिक स्थिति और प्राथमिकताओं पर करना चाहिए विचार
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नए कार्यालय को लेकर भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। सुधीर शर्मा ने नए मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्माण और उस पर होने वाले खर्च का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार को अपनी प्राथमिकताओं पर विचार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को सचिवालय के नए अलर्जली फेज-2 भवन से कामकाज शुरू किया।
सुधीर शर्मा ने नए मुख्यमंत्री कार्यालय को लेकर तंज करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को सचिवालय में नया कार्यालय मिल रहा है। उनके मुताबिक, इस कार्यालय के निर्माण पर करीब ₹50 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतिहास में इससे पहले किसी मुख्यमंत्री के कार्यालय के निर्माण पर इतनी बड़ी राशि खर्च किए जाने का उदाहरण नहीं रहा है। हालांकि, हालिया रिपोर्टों में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े खर्च को लेकर अलग-अलग आंकड़े और दावे सामने आए हैं।
भाजपा विधायक ने सेंटर यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि एक ओर नए मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए करीब ₹50 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण के लिए ₹20 करोड़ उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।
सुधीर शर्मा ने सरकार से सवाल किया कि विकास और शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए धन की कमी क्यों बताई जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्माण पर इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही है।
सुधीर शर्मा ने नए कार्यालय में लगाए गए फर्नीचर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कार्यालय में लगाए गए कुछ सोफों की कीमत प्रति सोफा ₹6 से ₹7 लाख तक बताई जा रही है और उनके बिल भी बनाए गए हैं। इन दावों पर सरकारी स्तर से खर्च का आधिकारिक विवरण सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
सुधीर शर्मा ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए सरकार से खर्च की प्राथमिकताओं पर विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए कि आने वाले समय में प्रदेश के पास कुछ भी शेष न रहे। अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ऐसी स्थिति नहीं बनानी चाहिए कि “प्रदेश, प्रदेश न रहे, कहीं केंद्र शासित प्रदेश न बन जाए।”
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