किसानों का कहना- उत्पादन लागत, मजदूरी और परिवहन खर्च बढ़ा, लेकिन मंडियों में नहीं मिले उम्मीद के मुताबिक दाम; बीन्स ₹30-32 के आसपास
सब्जियों के पूरे सीजन में अपेक्षित दाम नहीं मिलने से किसानों में मायूसी है। किसानों का कहना है कि इस बार उत्पादन लागत लगातार बढ़ती रही, लेकिन मंडियों में फसलों को लागत के अनुरूप भाव नहीं मिल पाया। सीजन अब अंतिम दौर में पहुंच गया है, लेकिन किसानों को दाम में राहत मिलने की उम्मीद भी कमजोर होती नजर आ रही है।
धरोड़ पंचायत के पूर्व प्रधान और किसान अमर सिंह ठाकुर ने कहा कि इस बार लगभग पूरे सीजन में किसानों को सब्जियों के उचित दाम नहीं मिल पाए। उन्होंने कहा कि अब सब्जियों का सीजन समाप्ति की ओर है, लेकिन किसानों को उनकी लागत के मुताबिक रेट नहीं मिला।
उनके अनुसार टमाटर की फसल भी इस बार किसानों के लिए उम्मीद के मुताबिक लाभदायक नहीं रही। टमाटर के दाम करीब ₹100 से ₹400 तक की रेंज में रहे और इससे ऊपर के दाम नहीं मिल पाए। शुरुआत में स्थानीय टमाटर की स्थिति बेहतर रही, लेकिन किसानों को अपेक्षित भाव नहीं मिला।
अमर सिंह ठाकुर ने कहा कि सब्जियों की खेती में बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी, सिंचाई और परिवहन समेत कई तरह के खर्च शामिल होते हैं। फसल तैयार होने के बाद उसे मंडी तक पहुंचाने में भी अतिरिक्त लागत आती है। ऐसे में जब मंडियों में दाम कम मिलते हैं तो किसानों के लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने बताया कि इस बार बीन्स के दाम भी किसानों के लिए संतोषजनक नहीं रहे। बीन्स करीब ₹30 से ₹32 प्रति किलो के आसपास बिक रही है। वहीं शिमला मिर्च के दाम भी किसानों को राहत देने वाले नहीं रहे। उनका कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और कम मंडी भाव के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
अमर सिंह ठाकुर के मुताबिक पहले किसान ऑफ सीजन में सब्जियां लगाकर बीच में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रखते थे। कई बार सीजन के दौरान किसी समय अच्छे रेट मिलने से किसानों को पूरे सीजन में हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो जाती थी। लेकिन इस बार किसानों को ऐसा मौका भी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि खर्चे लगातार बढ़े हैं, जबकि फसलों के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़ पाए।
उन्होंने कहा कि वह लगातार किसानों के संपर्क में हैं और इस समय अधिकतर किसान मायूस नजर आ रहे हैं। किसान अपनी फसल की अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद करता है, लेकिन मंडी में अपेक्षित भाव नहीं मिलने पर खेती की पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि अब सब्जियों का सीजन अंतिम दौर में है और बीन्स जैसी फसलों में भी करीब ₹30-₹32 का ही भाव मिल रहा है। इसके साथ फसल को मंडी तक पहुंचाने का खर्च अलग से जुड़ जाता है।
किसानों का कहना है कि जब उत्पादन लागत लगातार बढ़ती रहे और मंडियों में फसल का भाव उस अनुपात में न मिले, तो खेती से मुनाफा निकालना चुनौती बन जाता है। ऐसे में सब्जी उत्पादक किसानों को आने वाले सीजन में बेहतर और लागत के अनुरूप बाजार भाव मिलने की उम्मीद है।
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