शिक्षा विभाग ने जिला उप निदेशकों से मांगी बिना TET शिक्षकों की सूची, प्रगति की नियमित होगी निगरानी
सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने राज्य के सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है।
शिक्षा विभाग ने सभी जिला उप निदेशकों (प्रारंभिक शिक्षा) को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में कार्यरत उन शिक्षकों की सूची तैयार करें, जिन्होंने अभी तक TET परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी पात्र सेवारत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक अनिवार्य रूप से TET उत्तीर्ण करनी होगी।
शिक्षा विभाग का कहना है कि समय सीमा बढ़ाने का उद्देश्य शिक्षकों को अपनी आवश्यक योग्यता पूरी करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाना है।
TET परीक्षा के लिए किया जाएगा जागरूक
विभाग शिक्षकों को TET परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके लिए उपलब्ध परीक्षा कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक समय रहते परीक्षा में भाग ले सकें।
शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि सभी संबंधित शिक्षकों को परीक्षा से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध हो।
जिला स्तर पर होगी निगरानी
निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर बिना TET शिक्षकों की प्रगति का नियमित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को शिक्षकों द्वारा की गई प्रगति और विभागीय कार्रवाई की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर निदेशालय को भेजनी होगी।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों की पहचान करना है, जो अभी तक TET की योग्यता पूरी नहीं कर पाए हैं और उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन देना है।
शिक्षा गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कदम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उनके अनुसार TET के माध्यम से शिक्षकों की योग्यता का मानक तय होता है, जिससे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने और राष्ट्रीय स्तर के शिक्षक मानकों को लागू करने में मदद मिलती है।
विभाग और शिक्षकों पर होगी जिम्मेदारी
अब संबंधित शिक्षकों और जिला शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे इन निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करें।
शिक्षा विभाग का यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के पालन के साथ-साथ प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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