श्रावण मास के प्रथम मंगलवार को हिमाचल सहित कई राज्यों से पहुंचे भक्त, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन और सवा मन चूरी का भोग
श्रावण मास के प्रथम मंगलवार को उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा रूद्रानंद आश्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बना रहा। सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा के तहत आयोजित पीपल-चूरी उत्सव में हिमाचल प्रदेश समेत पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु आश्रम पहुंचे।
आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन पंच पीपल की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद सवा मन चूरी का भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति गीतों, मंत्रोच्चार और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
उत्सव में पहुंचे श्रद्धालुओं ने पंच पीपल की परिक्रमा कर बाबा रूद्रानंद के अखंड धूने के दर्शन किए। भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मंगल जीवन की कामना की।
श्रद्धालुओं का कहना है कि वर्षों से चली आ रही मान्यता के अनुसार आश्रम में मिलने वाले चूरी प्रसाद को घर के मंदिर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
श्रद्धालुओं ने बताया कि पीपल-चूरी उत्सव में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है और बाबा रूद्रानंद आश्रम उनकी अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है।
पंच पीपल और अखंड धूने से जुड़ी धार्मिक मान्यता
आश्रम अधिष्ठाता स्वामी हेमानंद महाराज ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में पांच महान ऋषियों ने इस स्थान पर कठोर तपस्या की थी। बाद में उन्होंने जीवंत समाधि लेकर वृक्ष रूप धारण किया और आज वे पंच पीपल के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं।
उन्होंने बताया कि काशी के स्वामी ब्रह्मानंद जी से दीक्षा प्राप्त करने के बाद महात्मा रुद्रानंद जी ने नारी गांव पहुंचकर इन्हीं पांच पीपलों के नीचे तपस्या की थी। वर्ष 1850 की बसंत पंचमी को उन्होंने यहां अखंड धूना प्रज्वलित किया था, जो आज भी निरंतर प्रज्ज्वलित है।
अखंड धूने और पंच पीपल के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था
स्वामी हेमानंद महाराज ने बताया कि स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विषैले जीव के काटने पर अखंड धूने की पवित्र विभूति और पंच पीपल की परिक्रमा से राहत मिलने की आस्था जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालु पंच पीपल की छांव में बैठकर और परिक्रमा कर मानसिक शांति प्राप्त करने की भावना रखते हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आश्रम पहुंचकर अखंड धूने के दर्शन और बाबा रूद्रानंद का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
संस्कृत शिक्षा और सेवा कार्यों के लिए प्रसिद्ध है आश्रम
डेरा बाबा रूद्रानंद आश्रम संस्कृत शिक्षा, वेदों के संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों के लिए भी प्रसिद्ध है। आश्रम में 24 घंटे नि:शुल्क लंगर और सेवा कार्य संचालित किए जाते हैं।
पीपल-चूरी उत्सव के अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्तजन मौजूद रहे।
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