मनेई में पर्यावरण संरक्षण की पहल का शुभारंभ, भूमि दान करने वाले राकेश और दिनेश सहित स्थानीय पर्यावरण संरक्षक व चित्रकार सम्मानित
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कांगड़ा जिले के मनेई (भद्रेला) में ‘परमार्थ इको विलेज’ का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सेवा के क्षेत्र में इस परियोजना को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने का प्रेरणादायक केंद्र बनेगा।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि यह केवल एक परियोजना की आधारशिला नहीं, बल्कि प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन स्थापित करने वाले विचार की नींव है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
भारतीय संस्कृति में पृथ्वी को माता, नदियों को जीवनदायिनी, पर्वतों को देवस्वरूप और वृक्षों को जीवन का आधार माना गया है। मनुष्य प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि संरक्षक है और उसका दायित्व धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध रूप में सौंपना है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए एक लाख पौधे लगाने का संकल्प
राज्यपाल ने जलवायु परिवर्तन को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि इसका समाधान केवल सरकारी नीतियों और योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जीवनशैली, सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना होगा।
उन्होंने ‘परमार्थ इको विलेज’ को एक जीवंत शिक्षण एवं प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया, जहां विद्यार्थी, किसान, शोधकर्ता, युवा उद्यमी और स्वयं सहायता समूह प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली को समझ सकें और अपनाएं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, अमृत सरोवर अभियान और मिशन लाइफ का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है।
राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश की नदियों, वनों, हिमालयी पारिस्थितिकी, जैव विविधता और प्राकृतिक जल स्रोतों को अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि इनके संरक्षण के साथ पर्यटन, कृषि, बागवानी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को इस तरह बढ़ावा देना होगा, जिससे प्रकृति पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
स्थानीय आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर जोर
राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि ‘परमार्थ इको विलेज’ में जैविक खेती, स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक जीवनशैली और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों, महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।
उन्होंने परम पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी के आध्यात्मिक साधना, मानव सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण को प्रेरणादायक बताया। साथ ही, ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना को सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रकृति संरक्षण से जोड़ने के उनके प्रयासों की सराहना की।
राज्यपाल ने परियोजना की परिकल्पना और इसे साकार करने के प्रयासों के लिए वृंदा फाउंडेशन ट्रस्ट की सराहना की। उन्होंने ट्रस्ट की संरक्षक डॉ. मेघना चौधरी को उनकी दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता के लिए बधाई दी।
भूमि दान करने वालों सहित स्थानीय प्रतिभाओं को किया सम्मानित
इस अवसर पर राज्यपाल ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक लाख पौधे लगाने के संकल्प का शुभारंभ किया। उन्होंने इको विलेज के निर्माण के लिए भूमि दान करने वाले राकेश और दिनेश को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय चित्रकार संजय धीमान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहीं स्थानीय पर्यावरण संरक्षक रूमी देवी को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर स्वामी दिव्यानंद पुरी महाराज, पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.के. शर्मा, पूर्व जिला न्यायाधीश अनिल, डॉ. मेघना चौधरी, फाउंडेशन के सदस्य राहुल शर्मा, संजीव सिंह, प्रमोद कुमार, आशीष कुमार और गौरांश सिरोही सहित डॉ. नीलू शर्मा, डॉ. गौतम पठानिया और प्रोफेसर अनुपम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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