थुनाग मिनी सचिवालय में वर्ष 2024 से चला रहीं कैंटीन, मंडी जिले में 8,274 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं 63,968 महिलाएं
हिमाचल प्रदेश में स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मंडी जिले के थुनाग क्षेत्र की ग्राम पंचायत उड़ीधार की आरती कुमारी इसकी एक मिसाल हैं।
सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आरती मिनी सचिवालय थुनाग में कैंटीन चला रही हैं और हर महीने करीब 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं।
स्वयं सहायता समूह से मिला कैंटीन चलाने का अवसर
आरती कुमारी सरस्वती स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह के माध्यम से उन्हें थुनाग मिनी सचिवालय में कैंटीन चलाने का अवसर मिला। वर्ष 2024 से वह एक अन्य महिला के साथ मिलकर कैंटीन का संचालन कर रही हैं। इस पहल से दोनों महिलाओं को रोजगार मिला है और वे अपनी आजीविका अर्जित कर रही हैं।
आरती के अनुसार, कैंटीन से उन्हें हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की आय हो जाती है। इस कमाई से वह घर का खर्च चलाने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग कर रही हैं। स्वरोजगार से जुड़ने के बाद उन्हें परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने में मदद मिली है।
एनआरएलएम के तहत मिला दो लाख रुपये का ऋण
आरती कुमारी ने बताया कि उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत दो लाख रुपये का ऋण मिला है, जिस पर 4 प्रतिशत ब्याज दर लागू है। इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूह को केंद्र सरकार की ओर से 15 हजार रुपये और प्रदेश सरकार की ओर से 25 हजार रुपये की स्टार्टअप राशि भी मिली है।
इस आर्थिक सहयोग से स्वयं सहायता समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने में मदद मिल रही है।
आरती कुमारी ने महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार और विशेष रूप से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, जिससे वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।
मंडी जिले में 8,274 स्वयं सहायता समूह गठित
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि मंडी जिले के 14 विकास खंडों में कुल 8,274 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनसे 63,968 महिलाएं जुड़ी हैं। जिले में 727 ग्राम संगठन और 48 क्लस्टर स्तरीय संघ भी कार्यरत हैं।
उन्होंने बताया कि जिले में 7,744 स्वयं सहायता समूहों और 662 ग्राम संगठनों की मैपिंग की जा चुकी है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका
उपायुक्त अपूर्व देवगन के अनुसार, स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इन समूहों के माध्यम से महिलाएं सामूहिक प्रयासों से आजीविका के नए साधन विकसित कर रही हैं। आरती कुमारी की तरह महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती में भी योगदान दे रही हैं।
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