एकल माता को दोनों बच्चों के लिए मिल रही 1000-1000 रुपये मासिक सहायता, सुंदरनगर में 435 बच्चे योजना से लाभान्वित
सुंदरनगर के अंबेडकर वार्ड की भावना देवी के लिए अपने दो बच्चों की परवरिश और पढ़ाई का खर्च अकेले उठाना किसी चुनौती से कम नहीं था। गृहिणी होने के साथ-साथ एकल माता के रूप में परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर थीं।
सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटे आर्यन और बेटी आयशा की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ था। ऐसे में इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई।
भावना देवी का बेटा आर्यन छठी कक्षा में और बेटी आयशा आठवीं कक्षा में पढ़ती है। उन्होंने बताया कि बच्चों की पढ़ाई, किताबों और अन्य जरूरी सामान के साथ उनके पालन-पोषण का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था।
इसी दौरान उन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने वर्ष 2024 में योजना के लिए आवेदन किया और उसी वर्ष से उन्हें इसका लाभ मिलना शुरू हो गया।
दोनों बच्चों के लिए मिल रही 1000-1000 रुपये की सहायता
योजना के तहत भावना देवी को दोनों बच्चों की शिक्षा के लिए एक-एक हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता मिल रही है। उनका कहना है कि एकल माता होने के कारण बच्चों की सभी जरूरतों को अकेले पूरा करना मुश्किल था, लेकिन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता ने उनकी परेशानी काफी कम की है।
प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए भावना देवी ने कहा कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना से उन्हें दोनों बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण का खर्च उठाने में काफी मदद मिल रही है। इससे उन्हें बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का भरोसा मिला है।
सुंदरनगर में 435 बच्चों को मिला योजना का लाभ
आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को शिक्षा के साथ बेहतर भविष्य का अवसर मिले, इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार की इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना महत्वपूर्ण सहारा बन रही है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी सुंदरनगर पूनम चौहान ने बताया कि वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 53.53 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इससे कुल 435 बच्चे लाभान्वित हुए हैं। इनमें 402 बच्चों को 1000 रुपये प्रति माह तथा 33 बच्चों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए सहायता राशि प्रदान की जा रही है।
18 वर्ष तक हर महीने 1000 रुपये की सहायता
योजना के तहत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जरूरतों के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि परिवारों को बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद कर रही है।
उच्च शिक्षा के लिए भी सरकार का सहयोग
योजना के तहत 18 से 27 वर्ष की आयु के पात्र युवाओं को सरकारी संस्थानों में निःशुल्क उच्च शिक्षा उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। इसमें ट्यूशन फीस, छात्रावास का खर्च और भोजन शुल्क शामिल हैं।
यदि छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो व्यावसायिक पाठ्यक्रम अथवा उच्च शिक्षा के दौरान रहने के लिए पात्र विद्यार्थियों को 3000 रुपये प्रतिमाह तक किराया सहायता देने का प्रावधान है।
योजना का लाभ लेने के लिए ये हैं पात्रता
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना आवश्यक है और परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए। विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता एवं निराश्रित महिलाओं तथा 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले अभिभावकों के पात्र बच्चों को भी योजना के तहत सहायता प्रदान की जाती है।
इच्छुक पात्र परिवार अपने क्षेत्र के बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आय प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, बच्चे का आयु प्रमाण पत्र तथा माता या अभिभावक की स्थिति से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं।
“हर बच्चे को मिले आगे बढ़ने का अवसर”: एसडीएम अमर नेगी
एसडीएम सुंदरनगर अमर नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना और इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा और विकास के समान अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते बच्चे
इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाना है। विशेष रूप से बेटियों के लिए उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होने से उनके आत्मनिर्भर बनने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
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