तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ वन परिक्षेत्र के 32 कार्यों में मिली गड़बड़ियां, जाली रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान लेने के आरोप; विजिलेंस ने दर्ज की FIR
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के तीसा, मसरूंड और टिकरीगढ़ वन परिक्षेत्र में मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों में करीब 55.01 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
इस मामले में वन विभाग के 22 अधिकारी और कर्मचारी विजिलेंस के रडार पर हैं। प्रारंभिक जांच में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
जाली रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान लेने के आरोप
विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित रूप से आपराधिक षड्यंत्र के तहत सरकारी रिकॉर्ड में वास्तविक कार्य और सामग्री से अधिक कार्य एवं सामग्री दर्शाकर भुगतान प्राप्त किया। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग और गबन किया गया।
विभागीय जांच में भी मिली थीं अनियमितताएं
विजिलेंस जांच से पहले वन विभाग की विभागीय जांच में भी अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी। जांच में मनरेगा के तहत कराए गए 41 कार्यों में से 32 कार्यों में गंभीर तकनीकी और वित्तीय गड़बड़ियां पाई गईं। इन कार्यों के निष्पादन और भुगतान के लिए संबंधित अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार पाए गए।
2019 की शिकायतों के बाद खुला मामला
यह मामला वर्ष 2019 में जिला परिषद सदस्य और स्थानीय लोगों द्वारा की गई शिकायतों के बाद सामने आया। शिकायत मिलने पर उपायुक्त चंबा ने जांच का जिम्मा जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) को सौंपा।
डीआरडीए द्वारा गठित तकनीकी समिति ने तीनों वन परिक्षेत्रों में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि कई परियोजनाओं में सामग्री मद में भुगतान तो दर्शाया गया, लेकिन मौके पर सामग्री का उपयोग नहीं मिला या रिकॉर्ड की तुलना में कार्य कम पाया गया।
एक कार्य में 1.96 लाख का भुगतान, मौके पर सामग्री नहीं मिली
जांच रिपोर्ट के अनुसार गुवाड़ी सेकेंड (तीसा रेंज) में कराए गए सीओ लैंड डेवलपमेंट वर्क में सामग्री मद के तहत 1.96 लाख रुपये खर्च दिखाए गए थे, जबकि पुनर्मूल्यांकन में मौके पर सामग्री का उपयोग शून्य पाया गया।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुई एफआईआर
विजिलेंस ने सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद तत्कालीन रेंज अधिकारियों, ब्लॉक अधिकारियों (डिप्टी रेंजर) और फॉरेस्ट गार्ड समेत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता/भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं 409, 420, 467, 468, 471 और 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
विजिलेंस ब्यूरो रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रहा है। जांच एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
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