5 से 10 अगस्त तक के सभी ऑनलाइन स्लॉट रिकॉर्ड समय में बुक, प्रशासन ने टोकन व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई; बिना टोकन गणेश बाग से आगे नहीं मिलेगी अनुमति
हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 इस वर्ष श्रद्धालुओं के बीच जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 30 जुलाई से शुरू हुई इस पवित्र यात्रा के पहले चार दिनों में ही 960 श्रद्धालु कैलाश दर्शन के लिए रवाना हो चुके हैं। रविवार को अकेले 352 श्रद्धालुओं ने तंगलिंग बेस कैंप से यात्रा शुरू की।
ढाई घंटे में भर गए 10 अगस्त तक के ऑनलाइन स्लॉट
यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इससे पहले 4 अगस्त तक के सभी स्लॉट पोर्टल खुलने के कुछ घंटों के भीतर ही बुक हो गए थे। वहीं रविवार को 5 से 10 अगस्त तक के लिए ऑनलाइन पंजीकरण दोबारा खोला गया, लेकिन महज ढाई घंटे में सभी स्लॉट भर गए।
प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन 175 ऑनलाइन स्लॉट उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन्हें श्रद्धालु तेजी से बुक कर रहे हैं।
ऑफलाइन पंजीकरण भी उपलब्ध
जिन श्रद्धालुओं को ऑनलाइन स्लॉट नहीं मिल पाए हैं, उनके लिए प्रशासन ने तंगलिंग बेस कैंप में ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा जारी रखी है। हालांकि, यात्रा में शामिल होने के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण के बाद तंगलिंग बेस कैंप से टोकन लेना भी जरूरी होगा। बिना टोकन वाले श्रद्धालुओं को गणेश बाग स्थित दूसरे बेस कैंप से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
टोकन व्यवस्था पर प्रशासन की सख्ती
यात्रा के शुरुआती दिनों में बिना टोकन पहुंचे श्रद्धालुओं के प्रति प्रशासन ने नरमी दिखाई थी, लेकिन अब नियमों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। तंगलिंग बेस कैंप से श्रद्धालुओं को दोपहर 1 बजे तक ही यात्रा के लिए रवाना होने की अनुमति दी जा रही है।
रात में शिवलिंग दर्शन के लिए भेजे जा रहे श्रद्धालु
श्रद्धालुओं के ठहरने और विश्राम की व्यवस्था गणेश बाग बेस कैंप में की गई है। यहां से यात्रियों को रात 2 से 4 बजे के बीच शिवलिंग दर्शन के लिए रवाना किया जाता है, ताकि वे सुबह दर्शन कर दोपहर तक सुरक्षित वापस बेस कैंप लौट सकें।
एसडीएम कल्पा की अपील
यात्रा समिति के अध्यक्ष एवं एसडीएम कल्पा प्रवीण भारद्वाज ने बताया कि 5 से 10 अगस्त तक के सभी ऑनलाइन स्लॉट बुक हो चुके हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यदि ऑनलाइन स्लॉट उपलब्ध नहीं हैं, तो वे ऑफलाइन पंजीकरण का लाभ उठाकर यात्रा में शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि किन्नौर कैलाश यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही है।
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