मनोज कुमार कौशल का दावा- रिकॉर्ड में 17 रीमिंग यूनिट्स, अधिकांश धरातल पर नहीं; सब्सिडी, रिवॉल्विंग फंड और नियुक्तियों में अनियमितता के लगाए आरोप
रेशम कीट पालन यानी सेरीकल्चर विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कथित भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। भारतीय सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस विंग से सेवानिवृत्त अधिकारी मनोज कुमार कौशल ने विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से करवाने की मांग की है।
पत्रकारों से बातचीत में मनोज कुमार कौशल ने दावा किया कि विभाग के रिकॉर्ड में 17 रीमिंग यूनिट्स संचालित होना दर्शाया गया है, जबकि इनमें से अधिकांश यूनिट्स धरातल पर मौजूद नहीं हैं। उनका आरोप है कि कथित तौर पर कागजों में संचालित इन यूनिट्स के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये की सब्सिडी और रिवॉल्विंग फंड जारी किया गया।
कौशल के अनुसार, 17 यूनिट्स में से कथित तौर पर केवल एक यूनिट को छोड़कर अन्य में वास्तविक काम नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये यूनिट्स वास्तव में संचालित नहीं थीं तो इनके नाम पर सरकारी सहायता राशि किस आधार पर जारी की गई।
पूर्व सैन्य अधिकारी ने विभाग में फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां किए जाने का भी आरोप लगाया। उनका दावा है कि ऐसे प्रमाणपत्रों के आधार पर करीब आठ लोगों को डेवलपमेंट ऑफिसर और सेरीकल्चर ऑफिसर जैसे पदों पर नियुक्तियां दी गईं।
उन्होंने संबंधित नियुक्तियों में इस्तेमाल किए गए शैक्षणिक प्रमाणपत्रों, अनुभव प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। कौशल ने कहा कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट होना चाहिए कि नियुक्तियों में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
मनोज कुमार कौशल ने शिमला में तैनात डिप्टी डायरेक्टर (सेरीकल्चर) सहित विभाग के अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कथित अनियमितताओं के पीछे अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत की आशंका जताई है।
इसके अलावा उन्होंने कुछ अधिकारियों से जुड़ी कथित बेनामी संपत्तियों और घुमारवीं तथा बंगाणा/बुघार क्षेत्र में होटल सहित अन्य संपत्तियों में निवेश किए जाने के आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत, CBI जांच की मांग
कौशल ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने मांग की है कि कथित फर्जी रीमिंग यूनिट्स, सब्सिडी और रिवॉल्विंग फंड के वितरण, अनुभव प्रमाणपत्रों तथा विभागीय नियुक्तियों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की जवाबदेही तय करते हुए सरकारी खजाने से जारी धनराशि की पूरी वसूली सुनिश्चित की जाए।
पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा कि मामला सरकारी धन और विभागीय व्यवस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से करवाई जानी चाहिए। उन्होंने CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी और यदि अनियमितताएं साबित होती हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
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