एनवायरो इंजीनियरिंग कंपनी पर नियमों के उल्लंघन का आरोप, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका की जांच और FIR दर्ज करने की मांग
हिमाचल प्रदेश के पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में बायोमेडिकल वेस्ट के कथित अवैध निस्तारण का मामला सामने आया है। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त इंटेलिजेंस अधिकारी मनोज कुमार कौशल ने एक औद्योगिक इकाई पर बायोमेडिकल वेस्ट जलाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच करवाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सोमवार को जिला मुख्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान मनोज कुमार कौशल ने आरोप लगाया कि पंडोगा स्थित एनवायरो इंजीनियरिंग नामक कंपनी को पाइप, प्लास्टिक और पीवीसी की रीप्रोसेसिंग का लाइसेंस दिया गया है, जबकि कथित तौर पर यहां हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को जलाया जा रहा है।
उन्होंने आशंका जताई कि इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ सकता है और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कंपनी की श्रेणी और मंजूरी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मनोज कुमार कौशल ने आरोप लगाया कि संबंधित औद्योगिक इकाई रेड कैटेगरी के अंतर्गत आती है, लेकिन कथित तौर पर इसे ऑरेंज कैटेगरी में मंजूरी प्रदान की गई। उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की।
कौशल के अनुसार, वर्ष 2022 में इस औद्योगिक इकाई को स्थापित करने के लिए दिए गए दो आवेदन अस्वीकार कर दिए गए थे। इसके बावजूद बाद में कंपनी को ऑरेंज कैटेगरी में मंजूरी मिल गई। उन्होंने इस पूरे मामले में कथित अनियमितताओं और अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की।
बायोमेडिकल वेस्ट जलाने से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरे की आशंका
कौशल ने आरोप लगाया कि कंपनी को पाइप, प्लास्टिक और पीवीसी की रीप्रोसेसिंग के लिए लाइसेंस मिला है, लेकिन वहां कथित तौर पर बायोमेडिकल वेस्ट जलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है, तो इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने और आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
उन्होंने संबंधित विभागों से मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच करने और आरोपों की सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
CM, DGP और SP को भेजी शिकायत
मनोज कुमार कौशल ने बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस अधीक्षक (SP), पुलिस महानिदेशक (DGP) और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित अधिकारियों तथा कंपनी मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, कंपनी और संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई पक्ष इस समाचार सामग्री में उपलब्ध नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
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