पंचायत प्रधान ने एनओसी को बताया फर्जी, पूर्व प्रधान के हस्ताक्षर जाली होने का आरोप; ग्रामीणों ने निर्माण और संचालन पर रोक लगाने की मांग की
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के पंजाब सीमा से सटे सिंगा गांव में प्रस्तावित स्टोन क्रशर को लेकर विरोध तेज हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने क्रशर की स्थापना पर आपत्ति जताते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिलाधीश (डीसी) से मुलाकात की।
उन्होंने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर क्रशर के निर्माण और संचालन पर रोक लगाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की।
घनी आबादी और कृषि भूमि के पास क्रशर लगाने का विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि घनी आबादी और कृषि योग्य भूमि के समीप स्टोन क्रशर स्थापित होने से गांव के पर्यावरण, स्वास्थ्य, खेती-बाड़ी और पशुपालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका आरोप है कि क्रशर से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
एनओसी को लेकर उठाए सवाल, फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप
पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने क्रशर स्थापना के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि क्रशर संचालक ने फर्जी दस्तावेजों और पूर्व पंचायत प्रधान के कथित जाली हस्ताक्षरों के आधार पर एनओसी तैयार करवाई है।
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व पंचायत प्रधान गुरुदेव जी ने भी स्पष्ट किया है कि एनओसी पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच करवाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
एसपी और डीसी को सौंपा ज्ञापन
भाजपा नेता धर्मेंद्र राणा और पंचायत प्रधान की मौजूदगी में ग्रामीणों ने अधिकारियों से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्रशर स्थापना से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए और यदि अनियमितताएं सामने आती हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि एनओसी की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और जांच पूरी होने तक क्रशर के निर्माण एवं संचालन पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि इससे गांव को संभावित पर्यावरणीय नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाया जा सकेगा।
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