Paper Leak पर सख्त कानून लागू: अब 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ जुर्माना; हमीरपुर के छात्रों-शिक्षकों ने किया स्वागत

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Paper Leak पर सख्त कानून लागू: अब 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ जुर्माना; हमीरपुर के छात्रों-शिक्षकों ने किया स्वागत

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पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट कानून-2026 पूरे देश में लागू, एआई धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड और संगठित नकल पर भी होगी कड़ी कार्रवाई

सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य प्रकार की धांधली पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाया गया पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट कानून, 2026 अब पूरे देश में लागू हो गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभावी हो गया है। नए कानून में पेपर लीक, संगठित नकल, परीक्षा प्रणाली हैक करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।

इस कानून को लेकर हमीरपुर में छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों से बातचीत की गई। अधिकांश लोगों ने इसे छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।

छात्रों ने कहा- वर्षों की मेहनत बचाएगा नया कानून

छात्रा ईरा शर्मा ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ देशभर में छात्रों ने आंदोलन किए थे और सरकार ने इस गंभीर समस्या पर सकारात्मक कदम उठाया है। उनके अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्र कई वर्षों की मेहनत लगाते हैं, लेकिन पेपर लीक होने पर उनकी मेहनत और मानसिक संतुलन दोनों प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा कि अब कड़ी सजा और भारी जुर्माने का डर ऐसे अपराधों को रोकने में मदद करेगा।

आरुषि सिंह ने कहा कि नीट जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी के बाद पेपर लीक की खबर छात्रों का आत्मविश्वास तोड़ देती है। नए कानून से ऐसे अपराधियों में भय पैदा होगा और परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित बनेगी।

सेजल ने कहा कि दोबारा परीक्षा होने पर छात्रों को पूरे सिलेबस की फिर से तैयारी करनी पड़ती है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है। उनके अनुसार यह कानून छात्रों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

छात्रा मोनिका ने कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए सबसे कठोर कानून होना चाहिए, क्योंकि इससे छात्रों की वर्षों की मेहनत दांव पर लग जाती है। उन्होंने कहा कि कई छात्र मानसिक अवसाद तक का शिकार हो जाते हैं, इसलिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

स्थानीय लोगों ने बताया सही दिशा में उठाया गया कदम

स्थानीय नागरिकों और भवानी सिंह ठाकुर ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन पूरी तरह उचित था। उनका मानना है कि जेल, भारी जुर्माना और समयबद्ध जांच जैसे प्रावधान भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाएंगे।

हर्ष चौहान, सक्षम ठाकुर और प्रवीण शर्मा ने भी कानून का समर्थन करते हुए कहा कि वर्ष 2022 से कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में सरकार का यह फैसला छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत करेगा।

शिक्षकों ने कहा- परीक्षा प्रणाली में लौटेगा विश्वास

लेक्चरर प्रेरणा शर्मा ने कहा कि पेपर लीक केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरी है। उन्होंने सरकार के सख्त कानून का स्वागत करते हुए प्रभावित छात्रों के लिए अलग राहत व्यवस्था की भी आवश्यकता बताई।

लेक्चरर शामली राणा ने कहा कि 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करने और कठोर सजा का प्रावधान अपराधियों में डर पैदा करेगा। इससे छात्रों और अभिभावकों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बढ़ेगा।

लेक्चरर शिवम ने कहा कि नीट पेपर लीक जैसी घटनाओं के बाद सरकार ने सख्त कानून बनाकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का रास्ता साफ किया है। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत दोषियों के लिए 5 से 10 वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है, जबकि संगठित गिरोहों पर और भी सख्त कार्रवाई होगी।

लेक्चरर विनय राणा ने कहा कि इस कानून से भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संस्था पेपर लीक जैसी गतिविधियों में शामिल होने से पहले कई बार सोचेगी।

नए कानून की प्रमुख बातें

हमीरपुर के छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगेगी और सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता तथा पारदर्शिता और अधिक मजबूत होगी।

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