नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल के चुनावी समर में जहाँ तृणमूल कांग्रेस (TMC) 'बंगाली अस्मिता' और 'खान-पान' को ढाल बनाकर भाजपा को घेर रही थी, वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की एक रणनीतिक 'एंट्री' ने पूरे खेल का रुख ही बदल दिया।
बंगाल की संस्कृति के सबसे अभिन्न हिस्से यानी 'मछली' को लेकर फैलाई जा रही आशंकाओं को अनुराग ठाकुर ने न केवल खारिज किया, बल्कि उसे भाजपा के पक्ष में एक बड़े चुनावी हथियार में बदल दिया।
मछली पर 'सियासी कांटा': तृणमूल की घेराबंदी
चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने इस नैरेटिव को हवा दी थी कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो वह राज्य की खान-पान की आदतों पर प्रहार करेगी और 'मीट-मछली' के सेवन पर प्रतिबंध लगा देगी।
चूँकि बंगाल में मछली दैनिक जीवन और सांस्कृतिक पहचान का अनिवार्य हिस्सा है, यह भावनात्मक मुद्दा जनता के बीच चिंता पैदा कर रहा था। भाजपा के लिए इस 'सांस्कृतिक प्रहार' के आरोप का जवाब देना एक बड़ी चुनौती बन गया था।
अनुराग ठाकुर की 'मछली डिप्लोमेसी'
इस अनिश्चितता के माहौल में अनुराग ठाकुर ने एक 'क्लाइमेक्स एंट्री' ली। उन्होंने सार्वजनिक रूप से दोपहर के भोजन में मछली का आनंद लेते हुए अपनी तस्वीरें साझा कीं और स्पष्ट संदेश दिया कि मछली खाना कोई छिपने वाली बात नहीं है।
ठाकुर ने कहा, यदि कोई मांसाहारी व्यक्ति बंगाल आकर यहाँ की मछली का स्वाद नहीं लेता, तो उसने बंगाल के आतिथ्य और संस्कृति को पूरी तरह समझा ही नहीं है। उन्होंने मछली खाने के स्वास्थ्य लाभों पर भी चर्चा की, जिससे जनता के बीच यह सीधा संदेश गया कि भाजपा किसी के व्यक्तिगत खान-पान में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
युवाओं के बीच 'आइकन' छवि का मिला लाभ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुराग ठाकुर की फिटनेस और उनके आधुनिक दृष्टिकोण की वजह से बंगाल के युवाओं के बीच उनकी जबरदस्त लोकप्रियता है। उनके फिटनेस वीडियो को बड़ी संख्या में बंगाली युवा फॉलो करते हैं।
साथ ही, पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में 'बांग्ला कंटेंट' और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों ने उन्हें पहले से ही बंगाल की जनता का प्रिय बनाया हुआ था। ऐसे में जब उनके जैसा 'फिटनेस आइकन' मछली की वकालत करता नजर आया, तो तृणमूल का नकारात्मक प्रचार पूरी तरह विफल हो गया।
मछली बनी 'चुनाव की रानी', भाजपा को बनाया 'सत्ता का राजा'
अनुराग ठाकुर के इस कदम ने न केवल भाजपा को सांस्कृतिक रूप से 'बंगाली' साबित करने में मदद की, बल्कि जनता के मन से उस डर को भी निकाल दिया जिसे विपक्षी दल हवा दे रहे थे।
परिणाम स्वरूप, मछली जिसे चुनाव में भाजपा के खिलाफ एक बाधा माना जा रहा था, वही भाजपा के लिए जीत की राह आसान करने वाली 'चुनाव की रानी' साबित हुई। इस 'क्लाइमेक्स एंट्री' ने भाजपा को बंगाल के घर-घर में स्वीकार्य बनाने और सत्ता की दहलीज तक पहुँचने में अहम भूमिका निभाई।