शिमला I
हिमाचल प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने महिला आरक्षण, महंगाई और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें महिला सम्मान का दिखावा बंद करना चाहिए क्योंकि जनता उनकी असलियत पहचान चुकी है।
विक्रमादित्य सिंह ने शिमला में हुई भाजपा की रैली का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने महिलाओं को लेकर जो बयान दिया था, उसे प्रदेश की जनता ने सुना है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा वास्तव में महिला हितैषी है, तो 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को तत्काल उसी रूप में लागू क्यों नहीं किया जा रहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम का हिमाचल दौरा केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है। वे यहाँ आते हैं, तस्वीरें खिंचवाते हैं, लेकिन स्थानीय नेताओं और समस्याओं से संवाद नहीं करते।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कांगड़ा दौरे पर भाजपा की बयानबाजी का जवाब देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी 'संगठन सृजन' कार्यक्रम के सिलसिले में आए थे। उन्होंने हिमाचल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं के साथ भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की है।
लोक निर्माण मंत्री ने विभाग से जुड़ी समस्याओं को साझा करते हुए बताया कि केंद्र की नीतियों के कारण प्रदेश के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं बिटुमेन और एलडीओ की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण PMGSY फेज-3 के तहत सड़कों का टारिंग कार्य रुक गया है।
कीमतों में उछाल की वजह से परियोजना की लागत में करीब 70 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। केंद्र सरकार से कई बार इस मुद्दे पर बात की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। अब इस विषय पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी।
कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी पर मंत्री ने कहा कि मतदान खत्म होते ही केंद्र ने अपना असली रंग दिखा दिया है। गैस महंगी होने से होटल और रेस्टोरेंट संचालक इसका बोझ आम जनता पर डालेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सस्ते तेल के विकल्प होने के बावजूद केंद्र सरकार इसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचने दे रही। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से पर्यटन सीजन में लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
विक्रमादित्य सिंह ने चार राज्यों के विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर पुनर्मतदान होना यह दर्शाता है कि आयोग निष्पक्षता से काम नहीं कर पा रहा है और केंद्र सरकार के दबाव में है।