शिमला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत पर हिमाचल प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने जहाँ एक ओर भाजपा को बधाई दी है, वहीं दूसरी ओर देश की संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं।
शिमला में मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) को एक 'कम्प्रोमाइज्ड बॉडी' (समझौतावादी संस्था) करार दिया।
बंगाल में कांग्रेस के भविष्य पर बोले विक्रमादित्य
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि बंगाल में पिछले 15 वर्षों से तृणमूल कांग्रेस का शासन था और उससे पहले लंबे समय तक वामपंथी (लेफ्ट) दल सत्ता पर काबिज रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि वहाँ कांग्रेस की मौजूदगी कम थी, लेकिन इस बार कांग्रेस ने सभी सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
उन्होंने विश्वास जताया कि जमीनी स्तर पर किए गए इस कार्य का फायदा कांग्रेस पार्टी को भविष्य में जरूर मिलेगा। उन्होंने भाजपा की जीत को स्वीकार करते हुए उन्हें औपचारिक रूप से बधाई भी दी।
"दबाव में काम कर रहा है चुनाव आयोग"
बधाई देने के साथ ही विक्रमादित्य ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "इसमें कोई दो राय नहीं है कि चुनाव आयोग अब एक 'कम्प्रोमाइज्ड बॉडी' बनकर रह गई है।
निष्पक्षता से काम करने वाली स्वतंत्र संस्थाएं अब दबाव में काम कर रही हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग ने अपनी निष्पक्षता साबित नहीं की, तो लोकतंत्र में लोगों का विश्वास इन संस्थाओं से पूरी तरह उठ जाएगा।
चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
विक्रमादित्य सिंह ने चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया अब 'न्यूट्रल' (तटस्थ) नहीं रही है। उन्होंने कहा, "पहले चयन प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते थे, लेकिन अब उन्हें हटाकर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और नेता प्रतिपक्ष को रखा गया है।
इसमें बहुमत हमेशा सरकार का ही रहता है, जिससे पारदर्शिता खत्म हो गई है।"
EVM और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस पर संदेह
ईवीएम (EVM) हैकिंग और निष्पक्षता के सवाल पर मंत्री ने कहा कि आज के दौर में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस इतना ज्यादा है कि कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर ईवीएम को लेकर संदेह पैदा करने वाले प्रमाण भी सामने आए हैं। उन्होंने मोबाइल फोन और सीसीटीवी सर्विलांस का हवाला देते हुए चुनावी प्रक्रिया की सुचिता पर सवाल खड़े किए।