शिमला।
हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों के वाहनों पर बढ़ाए गए एंट्री टैक्स को लेकर पैदा हुआ विवाद अब अंतरराज्यीय टकराव में बदल गया है। पंजाब सरकार के कड़े एतराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बाद अब हिमाचल की सुक्खू सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है।
ताजा कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई है और सरकार अब टैक्स दरों पर पुनर्विचार करने की योजना बना रही है।
संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और बातचीत के बाद एक 'लिबरल पॉलिसी' (उदार नीति) लाने पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, सरकार टेंडर प्रक्रिया पूरी कर चुकी है, लेकिन जनता की सुविधा और पड़ोसी राज्यों के साथ सौहार्द बनाए रखने के लिए नियमों में बदलाव की गुंजाइश तलाशी जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी दूरभाष पर चर्चा की है।
जहाँ एक ओर सरकार समझौते की राह पर है, वहीं कैबिनेट के भीतर से तीखी प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं।
अनिरुद्ध सिंह (पंचायती राज मंत्री): उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह पंजाब सरकार की इच्छा है कि वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएं या भगवान के पास। उनके इस बयान ने सियासी माहौल को और गर्मा दिया है।
विक्रमादित्य सिंह और केवल सिंह पठानिया: इन्होंने भी मामले पर अपनी राय रखी और सरकार के आगामी कदमों के प्रति एकजुटता दिखाई।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'अपरिपक्वता' का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि गलत फैसलों के कारण हिमाचल की पूरे देश में जग हंसाई हो रही है।
विधायक सुधीर शर्मा और रणधीर शर्मा ने कहा कि टैक्स में की गई यह बढ़ोतरी पूरी तरह गलत है और इसका खामियाजा हिमाचल के अपने पर्यटन और स्थानीय लोगों को भी भुगतना पड़ सकता है। भाजपा ने मांग की है कि इस बढ़ोतरी को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।