शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के 8वें दिन आज 'मूल्य परिवर्धित कर (VAT) अधिनियम 2005' संशोधन विधेयक को सदन में भारी शोर-शराबे के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
विपक्ष ने इस बिल को 'जनविरोधी' करार देते हुए सदन से वॉकआउट किया। भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने केवल अपनी जिद और 'ईगो' की खातिर इस बिल को पारित किया है, जिसका सीधा असर प्रदेश की गरीब जनता की जेब पर पड़ेगा।
महंगाई का 'डबल डोज': ₹5 तक लगेगा सेस
सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि विधवा और अनाथ कल्याण के नाम पर पेट्रोल-डीज़ल पर ₹5 तक का अतिरिक्त सेस (Cess) लगाना तर्कसंगत नहीं है। इससे न केवल माल ढुलाई महंगी होगी, बल्कि दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम भी बढ़ेंगे।
पड़ोसी राज्यों से महंगा होगा तेल, घटेगी खपत
रणधीर शर्मा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को घेरा:
वर्तमान टैक्स: हिमाचल में पहले से ही पेट्रोल पर 17.5% और डीज़ल पर 13.9% टैक्स वसूला जा रहा है।
तुलना: सेस लगने के बाद हिमाचल में तेल के दाम पंजाब और हरियाणा की तुलना में काफी अधिक हो जाएंगे।
नुकसान: भाजपा विधायक ने तर्क दिया कि तेल महंगा होने से सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग पड़ोसी राज्यों से तेल भरवाएंगे, जिससे हिमाचल में खपत घटेगी और सरकार का राजस्व बढ़ने के बजाय कम हो जाएगा।
"मुख्यमंत्री की ईगो का नतीजा"
रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हर विषय पर राजनीति करते हैं। मुख्यमंत्री ने अपनी आदत के अनुसार केवल अपनी 'ईगो' की संतुष्टि के लिए इस बिल को पारित किया है। उन्हें आम जनता की तकलीफों से कोई लेना-देना नहीं है। आज हर घर में वाहन है और इस बढ़ोतरी का सीधा असर प्रदेश के हर नागरिक पर पड़ेगा।
पेट्रोल पंप मालिकों पर आरोपों का जवाब
मुख्यमंत्री द्वारा पेट्रोल पंप मालिकों को लेकर दिए गए बयानों पर पलटवार करते हुए रणधीर शर्मा ने कहा कि इस बढ़ोतरी से पंप मालिकों पर नहीं, बल्कि आम जनता पर असर पड़ेगा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के अपने नेताओं के भी कई पेट्रोल पंप हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जनहित में इस विधेयक को तुरंत वापस लिया जाए।