“फाइलों में विकास, जमीन पर विनाश: साढ़े तीन साल में हिमाचल बेहाल”: विपिन सिंह परमार

“फाइलों में विकास, जमीन पर विनाश: साढ़े तीन साल में हिमाचल बेहाल”: विपिन सिंह परमार
“फाइलों में विकास, जमीन पर विनाश: साढ़े तीन साल में हिमाचल बेहाल”: विपिन सिंह परमार

Published:

धर्मशाला।

हिमाचल प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार की नाकामियों का एक और बड़ा प्रमाण हाल ही में सामने आई दो गंभीर खबरों से स्पष्ट हो गया है। एक तरफ अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रमों के नाम पर करोड़ों रुपये की डीपीआर तैयार की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर बजट का कोई प्रावधान नहीं है,

वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटें बढ़ाने के नाम पर महज घोषणाओं की राजनीति की जा रही है। इन दोनों मामलों ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश की सरकार केवल कागजों और फाइलों में ही विकास दिखा रही है, जबकि धरातल पर हालात बद से बदतर हो चुके हैं।

विपिन सिंह परमार ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि साढ़े तीन वर्षों में कांग्रेस सरकार ने हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्रदेश की जनता हर वर्ग में आज त्रस्त है—चाहे किसान हो, युवा हो, कर्मचारी हो या व्यापारी। सरकार की नीतियां पूरी तरह से दिशाहीन और जनविरोधी साबित हुई हैं।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत करोड़ों रुपये की योजनाओं की डीपीआर तैयार करना और फिर उनके लिए एक रुपया तक का बजट उपलब्ध न कराना, यह सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या यह सिर्फ दिखावे की राजनीति नहीं है? क्या गरीब और वंचित वर्ग के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है? विभागों से टोकन मनी तक न आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार के पास न तो कोई ठोस योजना है और न ही विकास के प्रति कोई गंभीरता।

मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटें बढ़ाने की घोषणा पर भी विपिन सिंह परमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह भी सिर्फ एक “जुमला” बनकर रह जाएगा। उन्होंने कहा कि जब मौजूदा संस्थानों में स्टाफ, उपकरण और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, तो सीटें बढ़ाने की बात करना जनता को गुमराह करने के अलावा कुछ नहीं है।

सरकार पहले यह बताए कि क्या सभी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ की कमी पूरी हो चुकी है? क्या अस्पतालों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं? अगर नहीं, तो ये घोषणाएं किस आधार पर की जा रही हैं?

परमार ने मुख्यमंत्री पर सीधा हमला करते हुए कहा कि प्रदेश में “एक व्यक्ति की सरकार” चल रही है। मुख्यमंत्री पूरी तरह तानाशाही रवैया अपनाते हुए सभी निर्णय खुद ही ले रहे हैं। न तो कैबिनेट मंत्रियों की राय ली जाती है और न ही विधायकों की बात सुनी जाती है। इससे सरकार के भीतर भी असंतोष की स्थिति है और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के महत्वपूर्ण निर्णय बिना सामूहिक विचार-विमर्श के लिए जा रहे हैं। लोकतंत्र में कैबिनेट प्रणाली का महत्व होता है, लेकिन यहां मुख्यमंत्री ही सर्वोच्च बनकर कार्य कर रहे हैं। यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है, बल्कि प्रदेश के विकास के लिए भी घातक है।

विपिन सिंह परमार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह डगमगा दिया है। कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, विकास कार्य ठप पड़े हैं, और सरकारी योजनाएं केवल फाइलों में सीमित होकर रह गई हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि सरकार के पास कर्मचारियों के वेतन और पेंशन तक के लिए संसाधनों की कमी दिखाई दे रही है।

उन्होंने आगे कहा कि किसानों को सिंचाई योजनाओं के नाम पर केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा। कई योजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं। यह सरकार केवल घोषणाओं की राजनीति कर रही है, लेकिन वास्तविकता में प्रदेश को पीछे धकेल रही है।

परमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया, तो जनता इसका करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश की जनता के साथ खड़ी है और हर मंच पर इन मुद्दों को उठाएगी।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को बचाने के लिए अब ठोस और जिम्मेदार नेतृत्व की जरूरत है, न कि ऐसी सरकार की जो केवल फाइलों में विकास दिखाकर जनता को भ्रमित करती रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को “विकासहीनता” और “आर्थिक संकट” की ओर धकेल दिया है, जिसका खामियाजा हर नागरिक भुगत रहा है।

इस खबर के विषय

संबंधित खबरें

घवांडल पशु चिकित्सालय में पशु जन्म नियंत्रण शिविर, 15 कुत्तों की सफल नसबंदी

घवांडल पशु चिकित्सालय में पशु जन्म नियंत्रण शिविर, 15 कुत्तों की सफल नसबंदी

पशु चिकित्सालय घवांडल में आयोजित पशु जन्म नियंत्रण शिविर में 15 श्वानों की सफल शल्य चिकित्सा की गई। इनमें 7 मादा और 8 नर कुत्ते शामिल रहे। शिविर का उद्देश्य ...

पूरा पढ़ें (Read More) →
करंट लगने से इकलौते बेटे की मौत, दो महीने बाद भी परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा प्रशासन; चार बहनों और बुजुर्ग माता-पिता का था सहारा

करंट लगने से इकलौते बेटे की मौत, दो महीने बाद भी परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा प्रशासन; चार बहनों और बुजुर्ग माता-पिता का था सहारा

बिलासपुर के श्री नयना देवी जी क्षेत्र के भटेड गांव में करंट लगने से जान गंवाने वाले गुरमेल सिंह के परिवार ने प्रशासन पर सुध न लेने का आरोप लगाया है। परिवार क...

पूरा पढ़ें (Read More) →
13 नवंबर को मंडी में CM सुक्खू के नेतृत्व में निकलेगी एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन, तैयारियों में जुटा प्रशासन

13 नवंबर को मंडी में CM सुक्खू के नेतृत्व में निकलेगी एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन, तैयारियों में जुटा प्रशासन

हिमाचल को चिट्टे के नशे से मुक्त बनाने के उद्देश्य से 13 नवंबर को मंडी में एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू...

पूरा पढ़ें (Read More) →
बीबीएमबी मामले पर विक्रमादित्य सिंह बोले- वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी हिमाचल के हक की लड़ाई, चंडीगढ़ में भी जारी रहेगी हिस्सेदारी की मांग

बीबीएमबी मामले पर विक्रमादित्य सिंह बोले- वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी हिमाचल के हक की लड़ाई, चंडीगढ़ में भी जारी रहेगी हिस्सेदारी की मांग

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बीबीएमबी में हिमाचल की हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इस कानूनी लड़ाई क...

पूरा पढ़ें (Read More) →
BBMB मामले में हिमाचल को बड़ी जीत, हर साल 600 से 1000 करोड़ रुपये का होगा फायदा: हर्षवर्धन चौहान

BBMB मामले में हिमाचल को बड़ी जीत, हर साल 600 से 1000 करोड़ रुपये का होगा फायदा: हर्षवर्धन चौहान

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने BBMB मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हिमाचल की बड़ी जीत बताया है। उनके अनुसार प्रदेश को 11,975 मिलियन यूनिट बिजली की बका...

पूरा पढ़ें (Read More) →

इससे पहले और बाद की खबरें