गर्मी और डिहाइड्रेशन के चलते बिगड़ी बच्चों की तबीयत, विधायक सतपाल सत्ती ने आयोजन के समय पर जताई आपत्ति
ऊना में बुधवार को आयोजित एंटी-चिट्टा वॉकाथॉन के दौरान गर्मी और डिहाइड्रेशन के चलते करीब डेढ़ दर्जन बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। कुछ बच्चे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ ने बच्चों का उपचार किया।
एंटी-चिट्टा वॉकाथॉन का आयोजन इंदिरा गांधी खेल परिसर से किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली और कॉलेज विद्यार्थी शामिल हुए। वॉकाथॉन का आयोजन नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से किया गया था।
बच्चों का हाल जानने अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री
बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू क्षेत्रीय अस्पताल ऊना पहुंचे और बच्चों का कुशलक्षेम जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के कारण कुछ बच्चों को डिहाइड्रेशन की समस्या हुई थी। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों ने बच्चों को उपचार दिया और अब उनकी हालत बेहतर है।
मुख्यमंत्री ने अस्पताल अधिकारियों और कर्मचारियों से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रही है। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और आधुनिक मशीनरी की सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
करीब 30 हजार विद्यार्थियों की भागीदारी
मुख्यमंत्री के अनुसार वॉकाथॉन में करीब 30 हजार छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जिनमें से कुछ बच्चों की तबीयत गर्मी के कारण खराब हुई। इससे पहले प्रशासन की ओर से भी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी की जानकारी दी गई थी।
विधायक सतपाल सत्ती ने समय पर जताई आपत्ति
वहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं ऊना के स्थानीय विधायक सतपाल सिंह सत्ती भी बच्चों का हाल जानने क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान जरूरी है, लेकिन इतने बड़े आयोजन के लिए समय का चयन उचित नहीं था।
सत्ती ने कहा कि उन्होंने आयोजन से पहले ही पत्रकारवार्ता के दौरान गर्मी में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर आशंका जताई थी। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों ने बच्चों को बेहतर उपचार दिया है और अब सभी सकुशल हैं।
नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान
एंटी-चिट्टा वॉकाथॉन का उद्देश्य युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था। प्रशासन की ओर से कार्यक्रम के लिए विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही और यातायात व्यवस्था के विशेष प्रबंध किए गए थे।
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