सिमिट्री में बंदरों के हमले से महिला की मौत का मामला उठाया, 5 लाख मुआवजे की मांग; 7 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
राजधानी शिमला में आवारा कुत्तों, बंदरों और लंगूरों के बढ़ते आतंक को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। शहर में जानवरों के हमलों की घटनाओं के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, डॉग बाइट और मंकी बाइट के मामलों में भी बढ़ोतरी की बात सामने आ रही है। इसी समस्या को लेकर सोमवार को शिमला नागरिक सभा ने नगर निगम के खिलाफ उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान सभा ने प्रशासन और नगर निगम से आवारा कुत्तों तथा बंदरों की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। नागरिक सभा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर नगर निगम का घेराव भी किया जाएगा।
बंदरों के हमले से महिला की मौत का मामला उठाया
शिमला नागरिक सभा के सचिव विवेक कश्यप ने कहा कि शहर में जानवरों के हिंसक हमलों के कारण लगातार जनहानि हो रही है। उन्होंने हाल ही में सिमिट्री क्षेत्र में बंदरों के हमले की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि बंदरों के हमले के बाद गिरने से एक महिला की दो दिन पहले मौत हो गई।
सभा ने इस घटना के लिए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है।
भीड़भाड़ वाले इलाकों में फीडिंग पॉइंट्स पर सवाल
विवेक कश्यप ने नगर निगम की ओर से बनाए गए फीडिंग पॉइंट्स पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कृष्णा नगर, संजोली और माल रोड जैसे मुख्य और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में फीडिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जिसके कारण महिलाओं और बच्चों को पैदल आवाजाही में परेशानी होती है।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत बने विकास नगर से छोटा शिमला मार्ग के फुटब्रिज जैसे स्थानों पर भी जानवरों के जमावड़े के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नागरिक सभा ने स्पष्ट किया कि वह जानवरों के खिलाफ नहीं है, लेकिन बंदरों का प्राकृतिक वास जंगल है। ऐसे में नगर निगम को वन विभाग के साथ मिलकर इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नीति तैयार करनी चाहिए।
बंदरों को जंगल और खूंखार कुत्तों के लिए शेल्टर की मांग
सभा ने नगर निगम के कमिश्नर को 7 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर जल्द राहत देने की मांग की। मांगों में बंदरों को शहर से हटाकर जंगलों में बसाने और खूंखार कुत्तों को शहर से हटाकर उनके लिए विशेष शेल्टर या जोन विकसित करने की मांग शामिल है।
विवेक कश्यप ने लोगों से भी अपील की कि आस्था के नाम पर आवारा जानवरों को खुले में चिप्स, बर्गर और अन्य जंक फूड न खिलाएं। उन्होंने कहा कि इस तरह का भोजन जानवरों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने नगर निगम से यह भी मांग की कि नियमों का उल्लंघन कर गलत स्थानों पर जानवरों को फीडिंग कराने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
नागरिक सभा के सचिव ने कहा कि केवल आश्वासनों से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अक्सर प्रदर्शन के बाद कुत्ते पकड़ने वाली गाड़ियां महज चार-पांच दिन तक सक्रिय रहती हैं और इसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, शिमला नागरिक सभा शहर के हर वार्ड में जाकर लोगों को लामबंद करेगी। जरूरत पड़ने पर नगर निगम का घेराव भी किया जाएगा।
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