प्रधानमंत्री मोदी ने ई-मेल से दी जन्मदिन की बधाई, शांता कुमार ने कहा- अब जीवन की अंतिम सांस तक जनता की सेवा करना ही इच्छा
पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार ने अपना 93वां जन्मदिन पालमपुर स्थित अपने निवास पर मनाया। जन्मदिन के अवसर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में नेता, कार्यकर्ता और शुभचिंतक उनके निवास पर पहुंचे और उन्हें जन्मदिन की बधाई दी।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ई-मेल के माध्यम से शांता कुमार को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री के संदेश पर शांता कुमार ने उनका आभार व्यक्त किया।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार, प्रदेश भाजपा वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर और पूर्व विधायक प्रवीन कुमार सहित अन्य नेताओं ने भी शांता कुमार के निवास पर पहुंचकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।
सिद्धांतों के अनुसार की राजनीति, सत्य का साथ नहीं छोड़ा
अपने 93वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर शांता कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में हमेशा सिद्धांतों के अनुसार राजनीति की। उन्होंने कहा कि सत्ता छोड़ दी, लेकिन सत्य का साथ कभी नहीं छोड़ा। अब उनकी एकमात्र इच्छा जीवन की अंतिम सांस तक जनता की सेवा करते रहना है।
शांता कुमार ने जन्मदिन के अवसर पर परमपिता परमात्मा का आभार जताया और मित्रों तथा शुभचिंतकों की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ट्रस्ट के माध्यम से संचालित संस्थाओं के जरिए उन्हें जनता की सेवा करने का अवसर मिल रहा है और यही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भेजे गए जन्मदिन संदेश के लिए भी आभार व्यक्त किया। शांता कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें याद कर बधाई संदेश भेजा, जिसके लिए वह स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं।
बोले- राजनीतिक जीवन में जो किया, सिद्धांतों के आधार पर किया
अपने लंबे राजनीतिक जीवन को याद करते हुए शांता कुमार ने कहा कि उन्हें किसी बात का दुख नहीं है, क्योंकि उन्होंने जो भी किया, सिद्धांतों के आधार पर किया। उन्होंने कहा, "मैंने सत्ता छोड़ दी, लेकिन सत्य को नहीं छोड़ा।"
उन्होंने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें संतोष होता है कि उन्होंने कभी गलत काम नहीं किया और सेवा की राजनीति को प्राथमिकता दी। शांता कुमार ने कहा कि उनकी सभी राजनीतिक इच्छाएं पूरी हो चुकी हैं। अब उनकी केवल यही इच्छा है कि जीवन के अंतिम समय तक सेवा का कार्य करते रहें।
उन्होंने स्वयं को बेहद प्रसन्न व्यक्ति बताते हुए कहा कि प्रभु और जनता के आशीर्वाद से उनकी सभी इच्छाएं पूरी हुई हैं।
अंत्योदय योजना की शुरुआत की बताई प्रेरणा
शांता कुमार ने अंत्योदय योजना की शुरुआत के पीछे की प्रेरणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान जेल में बिताए 19 महीनों में उन्होंने स्वामी विवेकानंद से संबंधित अनेक पुस्तकें पढ़ीं। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर उनके मन में यह धारणा मजबूत हुई कि समाज के सबसे अंतिम और गरीब व्यक्ति का उत्थान सबसे पहले होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इसी सोच के तहत हिमाचल प्रदेश में एक लाख सबसे गरीब लोगों का चयन कर अंत्योदय योजना शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ सबसे पहले जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि इस योजना से अनेक गरीब परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने में मदद मिली और उन्हें इसका संतोष है।
गरीबों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने पर जोर
शांता कुमार ने कहा कि आज देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास कर रहा है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग गरीबी की स्थिति में हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि देश में अंत्योदय की भावना को आगे बढ़ाते हुए गरीबों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
93वें जन्मदिन के अवसर पर शांता कुमार के निवास पर पहुंचे नेताओं, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
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