भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने हिमाचल प्रदेश को कर्ज, झूठे वादों और राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति की ओर धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के हितों के बजाय एक "सिंडिकेट" की तरह काम कर रही है।
'सुक्खू सरकार को मिले पांच खिताब'
राजेंद्र राणा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नाम पांच अलग-अलग "खिताब" दर्ज हो चुके हैं। उनके अनुसार इनमें उत्तर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री, अपने कार्यकाल में सबसे अधिक कर्ज लेने वाले मुख्यमंत्री, मित्रों की सरकार चलाने, सबसे अधिक झूठ बोलने और राजनीतिक विरोधियों पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने जैसे आरोप शामिल हैं।
'सरकार नहीं, सिंडिकेट चल रहा'
राणा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकार नहीं बल्कि एक सिंडिकेट काम कर रहा है, जो वर्षों से सक्रिय है और सरकारी संसाधनों का उपयोग अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छोटे से राज्य में बड़ी संख्या में ओएसडी, मीडिया सलाहकार और समन्वयकों की नियुक्ति कर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि वर्ष 1971 से 2022 तक विभिन्न सरकारों ने कुल 68 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था, जबकि वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में ही लगभग 44,600 करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर वर्ष औसतन 12 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार से सड़कों और आपदा राहत के लिए पर्याप्त धनराशि मिली, लेकिन उसका प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है।
एचआरटीसी, ओपीएस और महिलाओं से जुड़े वादों का भी किया जिक्र
राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि सरकार एचआरटीसी सेवाओं, पुरानी पेंशन योजना (OPS) और महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह देने जैसे चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार लाभ कमाने वाली सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की दिशा में काम कर रही है।
पंचायत चुनाव परिणामों का भी किया उल्लेख
राणा ने पंचायत चुनावों के परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि जनता सरकार के कामकाज का जवाब दे रही है और आने वाले चुनावों में इसका असर और स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।
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