हिमाचल प्रदेश में न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ और सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि 11 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन लगातार जारी है और जब तक सरकार न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि यदि 5 सितंबर तक सरकार ने कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक तथा निर्णायक रूप दिया जाएगा।
संयुक्त समिति के गठन में देरी का आरोप
रमेश शर्मा ने बताया कि 25 जुलाई को प्राथमिक शिक्षकों की पदयात्रा शिमला पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सचिवालय में बैठक हुई थी। बैठक में प्राथमिक शिक्षक संघ और वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाकर मांगों पर विचार करने का निर्णय लिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि समिति के गठन में अनावश्यक देरी की गई। साथ ही 5 अगस्त को हुई बैठक में ऐसे कई शिक्षक संगठनों को भी बुलाया गया, जिनका न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम से सीधा संबंध नहीं है।
कई शिक्षक संगठनों ने भी किया विरोध
संघ के अनुसार, शिक्षा विभाग को उम्मीद थी कि अन्य शिक्षक संगठन न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम का समर्थन करेंगे, लेकिन बैठक में अधिकांश संगठनों ने इसका विरोध किया।
रमेश शर्मा ने दावा किया कि टीजीटी, सीएंडवी, साइंस मास्टर, टीजीटी आर्ट्स, स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ सहित कई संगठनों ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे "न्यू जुगाड़ तंत्र" बताया।
रिक्त पद भरने के बजाय प्रतिनियुक्ति का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिक विद्यालयों में खाली पद भरने के बजाय प्रतिनियुक्ति के माध्यम से व्यवस्था चलाई जा रही है, जिससे प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और भविष्य में माध्यमिक शिक्षा पर भी इसका असर पड़ेगा।
'सरकार जमीनी हकीकत देखे'
रमेश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री केवल विभागीय रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि जमीनी स्थिति को भी समझें। उन्होंने आशंका जताई कि शिक्षा विभाग सरकार को वास्तविक स्थिति से अलग रिपोर्ट दे सकता है।
5 सितंबर तक फैसले की मांग
संघ ने स्पष्ट किया कि क्रमिक अनशन जारी रहेगा। यदि 5 सितंबर तक न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा।
रमेश शर्मा ने कहा कि पिछली बार केवल आश्वासन मिला था, लेकिन इस बार शिक्षक ठोस निर्णय चाहते हैं।
'अब यह जनआंदोलन बन चुका है'
उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को हजारों प्राथमिक शिक्षकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, जेबीटी बेरोजगारों, एसएमसी सदस्यों, मल्टी टास्क वर्करों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम लोगों का समर्थन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि चौड़ा मैदान में करीब 15 हजार लोगों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यह आंदोलन अब केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि प्राथमिक शिक्षा बचाने का जनआंदोलन बन चुका है।
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