श्री नयना देवी क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक पाठशाला सलोआ का मामला, स्कूल प्रबंधन समिति बोली- बच्चों की नींव कमजोर हुई तो भविष्य कैसे बनेगा
जब स्कूल में शिक्षक ही नहीं होगा तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे और उनका भविष्य कैसे संवरेगा? हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्र में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला सलोआ की स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। इस सरकारी स्कूल में पिछले करीब एक वर्ष से कोई नियमित शिक्षक कार्यरत नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इस प्राथमिक पाठशाला में करीब 13 छोटे बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा की उम्मीद के साथ सरकारी स्कूल भेजते हैं, लेकिन स्कूल में नियमित शिक्षक नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। फिलहाल स्कूल में शिक्षा व्यवस्था डेपुटेशन पर आने वाले शिक्षकों के भरोसे चल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी किसी शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाती है तो कभी किसी दूसरे शिक्षक को डेपुटेशन पर भेज दिया जाता है। कुछ समय बाद शिक्षक बदल जाने से बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता नहीं बन पा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन स्कूल की स्थिति में अब तक कोई स्थायी बदलाव नहीं हुआ।
स्कूल प्रबंधन समिति ने उठाई स्थायी शिक्षक की मांग
स्कूल प्रबंधन समिति सलोआ के प्रधान अजय कुमार ने कहा कि स्कूल में वर्तमान में नियमित शिक्षक नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा की नींव अगर कमजोर होगी तो उनके भविष्य की मजबूत इमारत कैसे तैयार होगी।
अजय कुमार ने कहा कि नेताओं और अधिकारियों की ओर से आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने बताया कि स्कूल में डेपुटेशन पर शिक्षक भेजे जा रहे हैं। कभी एक शिक्षक तो कभी दूसरे शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है।
शिक्षा विभाग ने बताई शिक्षक न पहुंचने की वजह
मामले को लेकर शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अरुण गौतम ने बताया कि स्कूल में नियमित शिक्षक की नियुक्ति के आदेश किए गए थे, लेकिन संबंधित शिक्षक वहां ज्वाइन नहीं कर पाए और बाद में अपने आदेश किसी अन्य स्कूल में करवाकर वहां तैनात हो गए।
उन्होंने बताया कि इसके बाद एक अन्य शिक्षक को सलोआ स्कूल भेजा गया, लेकिन यह मामला भी न्यायालय में चला गया। इसी कारण फिलहाल स्कूल में शिक्षक की व्यवस्था डेपुटेशन के माध्यम से की जा रही है।
अब सवाल यह है कि न्यायालय में मामला लंबित रहने के बीच सलोआ स्कूल के 13 बच्चों की नियमित पढ़ाई की व्यवस्था कब तक अस्थायी शिक्षकों के भरोसे चलेगी? ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन समिति की मांग है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्कूल में जल्द से जल्द स्थायी शिक्षक की व्यवस्था की जाए।
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