पच्छाद में 12 स्कूलों में नहीं है एक भी शिक्षक, अभिभावक चंदा जुटाकर कर रहे शिक्षकों की व्यवस्था; सरकार ने सिंगल टीचर स्कूलों के लिए नीति बनाने का किया ऐलान
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। भाजपा विधायक रीना कश्यप ने शून्यकाल के दौरान पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में शिक्षकों की कमी और बिना शिक्षक चल रहे स्कूलों का मामला उठाते हुए सरकार से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि पच्छाद में 12 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। इनमें कुछ स्कूलों में 40 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात 1:10 है। हालांकि दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। सरकार युक्तिकरण के माध्यम से इन क्षेत्रों में खाली पदों को भरने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की तैनाती में कई तरह के दबाव होते हैं और कई बार नियुक्ति व तैनाती के आदेशों में संशोधन भी करना पड़ता है। सरकार अब तक करीब 9 हजार शिक्षकों के पद भर चुकी है, जबकि कार्यकाल पूरा होने तक 6500 और शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
विधायक रीना कश्यप ने बताया कि नारग में छह और सराहां में पांच स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। कई स्कूलों में शिक्षक न होने के कारण अभिभावक स्वयं धन एकत्र कर शिक्षकों की व्यवस्था करने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रधानाचार्य और प्रवक्ताओं के खाली पदों को भरने की भी मांग की।
सिंगल टीचर स्कूलों के लिए बनेगी नीति
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार सिंगल टीचर स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नीति तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अभी 150 स्कूल बिना शिक्षक चल रहे हैं, जबकि करीब 3500 स्कूलों में केवल एक शिक्षक तैनात है। इसके अलावा करीब 2500 स्कूल ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 15 से कम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरमौर को केंद्र सरकार ने आकांक्षी जिला घोषित किया है। लिखित परीक्षा के माध्यम से होने वाली भर्तियों में सिरमौर के युवा बड़ी संख्या में चयनित हो रहे हैं। सरकार सिरमौर को प्रदेश का ‘सिरमौर’ बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
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