सुक्खू बोले- सभी पात्र कर्मचारियों को मिलेगा पुरानी पेंशन योजना का लाभ, जयराम ठाकुर ने कर्मचारी-पेंशनर आंदोलनों पर सरकार को घेरा; ब्यास में ड्रेजिंग से बाढ़ जोखिम घटाने और राजस्व जुटाने की योजना
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की दसवीं और अंतिम बैठक गुरुवार को प्रश्नकाल के साथ शुरू हुई। सत्र के आखिरी दिन विधायकों ने सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सरकारी भर्तियों, आपदा राहत और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से सवाल किए। अंतिम बैठक में कुल 92 सवाल पूछे गए, जिनमें 50 तारांकित और 42 अतारांकित प्रश्न शामिल रहे।
सभी पात्र कर्मचारियों को मिलेगा OPS का लाभ
पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के सभी पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों के लंबित भुगतान के मुद्दे पर कहा कि जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई थी, उस समय प्रदेश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 67 वर्ष से अधिक आयु के सभी कर्मचारियों के लंबित भुगतान किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र से आपदा के लिए अपेक्षित राशि मिलती, प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 1500 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त होती और राजस्व घाटा अनुदान बंद नहीं किया जाता, तो कर्मचारियों के अन्य लंबित भुगतान भी पूरे किए जा सकते थे।
जयराम ठाकुर ने कर्मचारी-पेंशनर आंदोलनों को लेकर घेरा
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के बयान पर अनुपूरक सवाल करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार कर्मचारी हितैषी है तो कर्मचारी और पेंशनर लगातार धरने और प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने बिजली बोर्ड कर्मचारियों के OPS को लेकर किए गए आंदोलनों का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना लागू की जा चुकी है तो बिजली बोर्ड के कर्मचारी OPS की मांग को लेकर आंदोलन क्यों कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने आपदा राहत के लिए मिली धनराशि के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
ब्यास नदी में ड्रेजिंग से बाढ़ का खतरा कम करने की तैयारी
मानसून सत्र के अंतिम दिन कुल्लू जिले में ब्यास नदी और बंजार विधानसभा क्षेत्र की सहायक खड्डों में ड्रेजिंग एवं माइनिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि नदियों की ड्रेजिंग के लिए उद्योग विभाग से अनुमति हासिल करने में काफी प्रयास करने पड़े हैं।
माइनिंग विभाग से भी अनुमति मिल चुकी है, जबकि अब भारत सरकार की स्वीकृति आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों से ड्रेजिंग सामग्री निकालने से एक ओर बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर इस सामग्री की नीलामी से प्रदेश को राजस्व भी प्राप्त हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से उपयोग हिमाचल की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। ड्रेजिंग के लिए अलग विभाग बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।
74 हजार मीट्रिक टन सामग्री उठाई, सरकार को मिली रॉयल्टी
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि ड्रेजिंग के लिए फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट (FCA) की अनुमति आवश्यक नहीं है। ड्रेजिंग के बाद निकाली गई सामग्री को अलग स्थान पर रखकर उसकी नीलामी की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि कैबिनेट के फैसले के बाद ड्रेजिंग और माइनिंग से संबंधित कार्य वन विभाग और वन निगम को सौंपा गया है। अब तक करीब 74 हजार मीट्रिक टन पत्थर उठाया जा चुका है और इसकी रॉयल्टी सरकारी खजाने में जमा करवाई गई है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ड्रेजिंग से निकलने वाली पूरी सामग्री उपयोग के योग्य नहीं होती। उन्होंने कहा कि ड्रेजिंग का खर्च संबंधित हाइड्रो पावर कंपनी को उठाना होगा, जबकि उपयोग योग्य सामग्री की नीलामी सरकार कर सकती है।
भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने उठाया ड्रेजिंग का मुद्दा
ब्यास नदी और सहायक खड्डों में ड्रेजिंग एवं माइनिंग को लेकर यह सवाल भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने उठाया था। उन्होंने कुल्लू जिले में ब्यास नदी और बंजार विधानसभा क्षेत्र की सहायक खड्डों में ड्रेजिंग के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।
सरकार के अनुसार नदियों से सिल्ट, पत्थर और अन्य सामग्री हटाने से बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही ड्रेजिंग से निकलने वाली उपयोग योग्य सामग्री की नीलामी कर सरकार राजस्व भी जुटा सकती है।
मानसून सत्र के अंतिम दिन सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, भर्ती प्रक्रिया, कर्मचारियों के भुगतान और आपदा राहत समेत कई जनहित के मुद्दे सदन में उठाए गए। 92 सवालों के जरिए विधायकों ने विभिन्न विभागों की योजनाओं और सरकार के कामकाज को लेकर जवाब मांगे।
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