जगह-जगह धंसा सड़क मार्ग, ग्रामीणों ने राहत और मरम्मत के फंड पर उठाए सवाल; हादसे का खतरा बढ़ा
हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्ष आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने प्रदेश के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कें और संपर्क मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए थे। सरकार की ओर से राहत और पुनर्निर्माण कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए गए, लेकिन कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति अब भी बदहाल बनी हुई है।
डलहौजी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बरंगाल-वांगल सड़क इसका उदाहरण बनकर सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह सड़क कई स्थानों पर पूरी तरह टूट चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जबकि कई हिस्सों में सड़क धंसने के कारण मार्ग का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसे में ग्रामीणों को रोजाना जोखिम उठाकर इस सड़क से आवाजाही करनी पड़ रही है।
एक साल बाद भी मरम्मत का इंतजार
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा को एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सड़क की स्थिति सुधारने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका आरोप है कि सड़क की हालत लगातार खराब होती जा रही है और बरसात के मौसम में यहां से गुजरना और भी जोखिम भरा हो जाता है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि आपदा के बाद सड़कों की बहाली और मरम्मत के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त बजट जारी किया गया था, तो बरंगाल-वांगल सड़क अब तक उपेक्षित क्यों है। लोगों ने डलहौजी विधानसभा क्षेत्र के लिए स्वीकृत राहत और मरम्मत राशि के इस्तेमाल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
बरसात में बढ़ जाता है हादसे का खतरा
सड़क के कई हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने और धंसने के कारण बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल हालत के चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क का तत्काल निरीक्षण करवाकर आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक सड़क की मरम्मत का मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की आवाजाही से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अब लोगों की नजर प्रशासन पर है कि बरंगाल-वांगल सड़क की हालत सुधारने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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