सुक्खू सरकार का बड़ा कदम: हिमाचल में जॉब ट्रेनी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का वेतन 78% बढ़ा
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने और उन्हें राज्य में ही बनाए रखने के लिए एक बड़ा वित्तीय फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) और कॉन्ट्रेक्ट मेडिकल ऑफिसरों के मासिक वेतन में 78 प्रतिशत की ऐतिहासिक बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब डॉक्टरों का मानदेय 33,660 रुपये से बढ़कर सीधे 60,000 रुपये प्रतिमाह हो जाएगा।
वेतन बढ़ोतरी का मुख्य कारण राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी को पूरा करने के लिए जॉब ट्रेनी डॉक्टरों की तैनाती की गई थी, लेकिन कम मानदेय के कारण डॉक्टर निजी अस्पतालों या पड़ोसी राज्यों का रुख कर रहे थे।
डॉक्टरों का तर्क था कि एमडी और एमएस जैसी उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद उनका वेतन योग्यता और अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम था। लंबे समय से उठ रही इस मांग को पूरा करते हुए सरकार ने यह राहत दी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में पहले भी बढ़ाए गए स्टाइपेंड सरकार इससे पहले भी डॉक्टरों के मानदेय में बड़ा इजाफा कर चुकी है:
पीजी डॉक्टर: प्रथम वर्ष का स्टाइपेंड 40,000 से 50,000 रुपये, द्वितीय वर्ष का 45,000 से 60,000 रुपये और तृतीय वर्ष का 50,000 से बढ़ाकर 65,000 रुपये किया गया।
सीनियर रेजिडेंट व ट्यूटर स्पेशलिस्ट: मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया गया।
सुपर स्पेशलिस्ट व सीनियर रेजिडेंट (सुपर स्पेशलिस्ट): स्टाइपेंड बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये प्रतिमाह किया गया।
2022 के बाद अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि वर्ष 2022 में छठे वेतन आयोग के तहत जॉब ट्रेनी डॉक्टरों का मानदेय 27,000 रुपये से बढ़ाकर 33,660 रुपये किया गया था। अब मौजूदा सरकार ने इसमें सीधे 26,340 रुपये (78%) की बढ़ोतरी कर इसे 60,000 रुपये कर दिया है।
मुख्यमंत्री का बयान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सरकार अस्पतालों में आधुनिक तकनीक और नई मशीनों का विस्तार करने के साथ-साथ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है।