10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित होने का दावा, 12 तारीख से जिला मुख्यालयों पर धरने देने की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों और कर्मचारियों की लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर पेंशनर जॉइंट एक्शन कमेटी ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।
सोलन में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में पेंशनरों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर रोष जताया और पांच प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) की घोषणा को नाकाफी बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि दिवाली तक लंबित देनदारियों का भुगतान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।
लंबित एरियर और सेवानिवृत्ति लाभों पर जताई नाराजगी
कमेटी के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की अनदेखी कर रही है। लंबे इंतजार के बाद पांच प्रतिशत डीए देने की घोषणा की गई, लेकिन इसके एरियर को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के वेतन आयोग के एरियर अब तक लंबित हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ भी नहीं मिले हैं। निगमों में पेंशन योजना लागू करने का वादा भी पूरा नहीं हुआ है।
करीब 10 हजार करोड़ की देनदारियां लंबित होने का दावा
18 संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश महामंत्री इंद्रपाल शर्मा ने दावा किया कि सरकार के पास कर्मचारियों और पेंशनरों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित हैं। समिति की ओर से सरकार को 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है, लेकिन दो वर्षों से मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने पांच प्रतिशत डीए को ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए कहा कि पेंशनरों को उनकी जायज मांगों के अनुरूप राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने वर्ष 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त पेंशनरों को 40 प्रतिशत भुगतान करने की मांग भी उठाई।
12 तारीख से धरने, 25 नवंबर को विधानसभा घेराव की चेतावनी
इंद्रपाल शर्मा ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर 12 तारीख से प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक क्रमिक धरने दिए जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर को धर्मशाला में विधानसभा के संभावित शीतकालीन सत्र के दौरान घेराव किया जाएगा।
बैठक में भूपराम वर्मा, देवीलाल ठाकुर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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