हिमाचल की 95 दवाओं के सैंपल फेल, CDSCO के सितंबर ड्रग अलर्ट में देशभर के 331 सैंपल गुणवत्ता जांच में खरे नहीं उतरे

हिमाचल की 95 दवाओं के सैंपल फेल, CDSCO के सितंबर ड्रग अलर्ट में देशभर के 331 सैंपल गुणवत्ता जांच में खरे नहीं उतरे
हिमाचल की 95 दवाओं के सैंपल फेल, CDSCO के सितंबर ड्रग अलर्ट में देशभर के 331 सैंपल गुणवत्ता जांच में खरे नहीं उतरे

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हिमाचल और उत्तराखंड की सबसे ज्यादा दवाएं सूची में शामिल, बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक, इंजेक्शन और अन्य दवाओं के सैंपल भी फेल

हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाओं के गुणवत्ता मानकों को लेकर एक बार फिर चिंता सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के सितंबर ड्रग अलर्ट के अनुसार, देशभर में 331 दवा और कॉस्मेटिक सैंपल गुणवत्ता जांच में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।

इनमें हिमाचल प्रदेश के 95 और उत्तराखंड के 69 दवाओं के सैंपल शामिल हैं। जांच में एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द-बुखार, खांसी, पेट और आंखों से संबंधित दवाओं के अलावा बच्चों के सिरप, इंजेक्शन और विटामिन उत्पादों के नमूने भी असफल पाए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश सैंपल डिसॉल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर और सक्रिय औषधीय घटक (API) की निर्धारित मात्रा जैसे गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

हिमाचल और उत्तराखंड की सबसे ज्यादा दवाएं सूची में

सितंबर के ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सबसे अधिक दवा सैंपल असफल पाए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में फेल हुए सैंपलों की संख्या इस प्रकार है:

विदेश में निर्मित 12 उत्पादों के सैंपल भी फेल

ड्रग अलर्ट में विदेश में निर्मित 12 उत्पादों के सैंपल भी गुणवत्ता मानकों पर असफल पाए गए। इनमें इटली के छह, पाकिस्तान के चार और थाईलैंड के दो उत्पाद शामिल हैं।

हिमाचल के किन उद्योगों की दवाओं के सैंपल फेल हुए?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के विभिन्न औषधि उद्योगों में निर्मित कई दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में असफल रहे। इनमें निम्न उत्पाद शामिल हैं:

अन्य राज्यों में निर्मित दवाओं के सैंपल भी असफल

ड्रग अलर्ट में हिमाचल के बाहर निर्मित कुछ अन्य दवाओं के सैंपल भी फेल पाए गए हैं। इनमें गुजरात के विमसन डेरमा उद्योग में निर्मित केटोकोनाजोल मेडिकेटेड साबुन शामिल है, जिसका उपयोग त्वचा के फंगल संक्रमण, दाद और खुजली में किया जाता है।

महाराष्ट्र के हिंदुस्तान लैबोरेट्री में निर्मित एस्पिरिन 150 एमजी दवा का सैंपल भी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। यह दवा प्लेटलेट्स को आपस में चिपकने से रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसका बैच नंबर टीएएस25011एएल है।

इसके अलावा लुधियाना के सोलर फार्मास्यूटिकल्स में निर्मित बीएस-टॉप क्रीम और हरियाणा के आरके लाइफ केयर में निर्मित कैफटन 1000 एमजी इंजेक्शन के सैंपल भी असफल पाए गए। इंजेक्शन का बैच नंबर आरकेसीएक्सबीपी003 बताया गया है।

दवा के किसी सैंपल का गुणवत्ता जांच में फेल होना संबंधित नमूने में निर्धारित मानकों के अनुरूप कमी का संकेत है। इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि कंपनी की सभी दवाएं खराब हैं। मरीजों को अपनी निर्धारित दवाएं बंद करने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

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