कांग्रेस नेताओं पर मनरेगा, पंचायत समिति की दुकानों और सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग के आरोप; रिकॉर्ड सार्वजनिक कर इस्तीफे की मांग
नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर रंजीत बख्शी जनकल्याण सभा के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकिल बख्शी ने सवाल उठाए हैं।
उन्होंने जसूर स्थित अपने कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष संदेश डडवाल और कांग्रेस ब्लॉक महासचिव तरसेम मनहास उर्फ पप्पू मनहास से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
अकिल बख्शी ने कहा कि यदि जनता और राजनीतिक संगठन की ओर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे गए लोगों पर सरकारी धन या संसाधनों के दुरुपयोग जैसे आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
मनरेगा में पत्नी की दिहाड़ी लगने का लगाया आरोप
अकिल बख्शी ने आरोप लगाया कि संदेश डडवाल के पंचायत प्रतिनिधि रहते हुए उनकी पत्नी के नाम मनरेगा में दिहाड़ियां लगाई गईं। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उनके पास उस समय के मस्टर रोल मौजूद हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संदेश डडवाल के परिवार से जुड़े लोगों को पंचायत में वेंडर या सप्लायर के रूप में भी लाभ मिला। बख्शी ने सवाल उठाया कि यदि पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं और खरीद प्रक्रिया का लाभ बार-बार एक ही परिवार या करीबी लोगों को मिला है, तो इसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए।
जसूर की पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन पर भी सवाल
अकिल बख्शी ने जसूर में पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ दुकानों का संबंध संदेश डडवाल और उनके करीबी लोगों से है तथा आवंटन प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दुकानें कम किराये पर हासिल करने के बाद उन्हें आगे अधिक रकम लेकर सबलेट करने का प्रयास किया गया। बख्शी ने कहा कि सरकारी संपत्ति के आवंटन और उसके आगे हस्तांतरण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए।
ब्लॉक की दुकानों को 13-13 लाख रुपये में देने का आरोप
अकिल बख्शी ने कांग्रेस जिला महासचिव तरसेम मनहास उर्फ पप्पू मनहास को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ब्लॉक की दुकानों को कथित तौर पर निजी दुकानें बताकर करीब 13-13 लाख रुपये में देने या बेचने का प्रयास किया गया।
बख्शी के अनुसार, इस संबंध में दो लोगों की ओर से उन्हें लिखित शिकायत या बयान मिले हैं, जिन्हें उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अथवा पंचायत समिति की संपत्ति को निजी संपत्ति की तरह बेचने या हस्तांतरित करने का प्रयास हुआ है, तो यह गंभीर मामला है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
‘सरकारी धन और संपत्ति से जुड़े मामलों की हो निष्पक्ष जांच’
अकिल बख्शी ने कहा कि इन आरोपों से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर पूरे मामले की जांच करवाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि मनरेगा के मस्टर रोल, पंचायत की वेंडर सूची, बिल-वाउचर, पंचायत समिति की दुकानों के आवंटन रिकॉर्ड, किराया रिकॉर्ड और कथित सबलेट या हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।
संदेश डडवाल और तरसेम मनहास के इस्तीफे की मांग
अकिल बख्शी ने संदेश डडवाल और तरसेम मनहास उर्फ पप्पू मनहास के इस्तीफे की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर इतने गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर बने रहने के बजाय नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि यदि आरोप गंभीर हैं तो संबंधित लोगों को किसका संरक्षण प्राप्त है।
‘आरोप सही पाए गए तो हो कड़ी कार्रवाई’
अकिल बख्शी ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी धन, सरकारी संपत्ति और जनता के अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो सरकार और प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
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