पूर्व मंत्री ने मंडी सांसद के रवैये पर उठाए सवाल, कहा- आपदा के समय जनता के बीच नहीं पहुंचीं और अब कैमरों के सामने अधिकारियों को बेइज्जत कर रही हैं
मंडी में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान सांसद कंगना रनौत द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को कथित तौर पर फटकार लगाए जाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रकाश चौधरी ने सांसद के रवैये पर कड़ा हमला बोला है।
प्रकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करना सांसद को शोभा नहीं देता। उन्होंने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास करार दिया।
‘साल में 364 दिन मुंबई में बिताती हैं सांसद’
प्रकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि कंगना रनौत साल के अधिकांश दिन मुंबई में रहती हैं और केवल एक दिन संसदीय क्षेत्र में आकर अपनी कथित नाकामियों को छिपाने के लिए अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर करती हैं।
उन्होंने कहा कि जब मंडी संसदीय क्षेत्र प्राकृतिक आपदा की गंभीर स्थिति से गुजर रहा था और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे, तब सांसद पीड़ितों का हाल जानने के लिए मौके पर नहीं पहुंचीं। प्रकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि उस समय वह मुंबई में फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त थीं।
आपदा राहत को लेकर भी साधा निशाना
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि सांसद बनने के बाद कंगना रनौत राष्ट्रीय राहत कोष या केंद्र सरकार से मंडी संसदीय क्षेत्र के आपदा प्रभावित लोगों के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं दिला पाईं। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
‘शासन चलाना फिल्मों की शूटिंग नहीं’
प्रकाश चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि शासन चलाना फिल्मों की शूटिंग नहीं है, जहां स्क्रिप्ट के आधार पर ड्रामेबाजी कर वाहवाही हासिल की जाए। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में दिन-रात काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का भी स्वाभिमान होता है।
उन्होंने कहा कि मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए सरकारी तंत्र का मनोबल गिराना हिमाचल की संस्कृति नहीं है।
नियमानुसार कार्रवाई की दी नसीहत
कांग्रेस नेता ने सांसद को नसीहत देते हुए कहा कि यदि किसी योजना या काम के क्रियान्वयन में कमी है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कैमरों के सामने अधिकारियों को कथित तौर पर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर राजनीतिक लोकप्रियता हासिल करने के बजाय सांसद को व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
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