प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कंगना पर लगाया पब्लिसिटी स्टंट का आरोप, जयराम सरकार के कार्यकाल और चुनावी चंदे को लेकर भी साधा निशाना
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने मंडी से सांसद कंगना रनौत के ‘दिशा’ बैठक में अधिकारियों के प्रति कथित रवैये पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान अधिकारियों को लताड़ना और अपना आपा खोना सांसद पद की गरिमा और मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
नरेश चौहान ने आरोप लगाया कि कंगना रनौत की नाराजगी के पीछे उनका राजनीतिक अनुभवहीन होना और सांसद निधि (MPLAD) के करीब 11 करोड़ रुपये खर्च न कर पाने की हताशा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को योजनाओं की समीक्षा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन अधिकारियों से दुर्व्यवहार करने के बजाय उपायुक्त की मौजूदगी में योजना-वार शालीनता से चर्चा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यवहार से प्रदेश की छवि प्रभावित होती है और इसका नुकसान मंडी की जनता को उठाना पड़ रहा है।
जयराम ठाकुर और पूर्व सरकार पर भी साधा निशाना
नरेश चौहान ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और पूर्व भाजपा सरकार के कामकाज पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल आलोचना करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सकारात्मक सुझाव देना भी विपक्ष का दायित्व है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व जयराम सरकार ने एसजेवीएनएल और अन्य राष्ट्रीय जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े समझौतों (MoUs) में प्रदेश के हितों को दरकिनार किया। साथ ही उन्होंने इंडस्ट्रियल एरिया के नाम पर हजारों बीघा जमीन औने-पौने दामों में देने का भी आरोप लगाया।
चौहान ने दावा किया कि इसके विपरीत वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार बनने के बाद से ही केंद्र, पड़ोसी राज्यों, बीबीएमबी, शानन प्रोजेक्ट, कशाऊ बांध और फाइव स्टार होटलों से जुड़े प्रदेश के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा होगा कि किस सरकार ने हिमाचल के हितों की रक्षा की और किसने प्रदेश के हितों से समझौता किया। उन्होंने कहा कि इसका फैसला प्रदेश की जागरूक जनता करेगी।
कैग रिपोर्ट को लेकर भी सरकार का बचाव
कैग रिपोर्ट और प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर नरेश चौहान ने कहा कि रिपोर्ट में कोई नई बात सामने नहीं आई है। उन्होंने प्रदेश की मौजूदा वित्तीय समस्याओं के लिए पिछली सरकारों के वित्तीय प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है और आगे भी गंभीरता से काम करेगी।
चुनावी चंदे के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा
राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी चंदे के मुद्दे पर भी नरेश चौहान ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ के दावे पर सवाल उठाते हुए इसे खोखला बताया।
उन्होंने गुजरात में कथित तौर पर कम जनाधार वाली अज्ञात पार्टियों को करोड़ों रुपये का चंदा मिलने, भाजपा की संपत्ति में वर्ष 2014 के बाद हुई कथित बढ़ोतरी और टाटा समूह से जुड़े चंदे एवं सब्सिडी के दावों का जिक्र किया।
चौहान ने मांग की कि केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से मामलों को दबाने के बजाय इस पूरे कथित नेक्सस की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए संसद या सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से जांच का रास्ता अपनाया जा सकता है।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube