राजस्व घाटे, बढ़ते कर्ज, सरकारी खरीद और GST में कथित अनियमितताओं पर उठाए सवाल, सरकार से दोषियों पर कार्रवाई की मांग
हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने कैग (CAG) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कैग की रिपोर्ट ने प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति, बढ़ते कर्ज के बोझ और सरकारी खरीद व GST से जुड़े मामलों में सामने आई अनियमितताओं को उजागर किया है।
संजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश की कुल राजस्व प्राप्तियों का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर खर्च हो रहा है। उनके अनुसार करीब 86 फीसदी राजस्व प्राप्तियां इन्हीं मदों में खर्च होने के कारण विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है।
राजस्व और राजकोषीय घाटे पर उठाए सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि प्रदेश का राजस्व घाटा 6,804 करोड़ रुपये, जबकि राजकोषीय घाटा 12,611 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति FRBM कानून के तहत निर्धारित वित्तीय सीमाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने वर्ष 2024-25 में सरकार की ओर से लिए गए 26,622 करोड़ रुपये के नए कर्ज का भी मुद्दा उठाया। संजय शर्मा के मुताबिक इसमें से 18,169 करोड़ रुपये पुराने कर्ज के मूलधन की अदायगी में खर्च हुए। उन्होंने इसे प्रदेश की वित्तीय स्थिति के लिए चिंताजनक बताते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए।
ई-टेंडरिंग और सरकारी खरीद पर भी सवाल
संजय शर्मा ने सरकारी खरीद में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम लागू होने के बावजूद कई खरीद इकाइयों ने इसका प्रभावी इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि 15 खरीद इकाइयों ने पांच वर्षों के दौरान पोर्टल पर 10 से भी कम निविदाएं डालीं। भाजपा प्रवक्ता ने इसे सरकारी खरीद व्यवस्था में गंभीर कमी बताया।
GST और राजस्व नुकसान का मामला
उन्होंने GST से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में 121 करोड़ रुपये के कारोबार को छिपाए जाने के संकेत मिले हैं, जिससे करीब 21.84 करोड़ रुपये की संभावित GST देनदारी बन सकती थी। इसके अलावा ई-वे बिल से जुड़ी खामियों के कारण 14.43 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की बात भी उन्होंने उठाई।
सार्वजनिक उपक्रमों के घाटे पर चिंता
भाजपा प्रवक्ता ने प्रदेश के सार्वजनिक उपक्रमों की वित्तीय स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 30 सार्वजनिक उपक्रमों में से 14 का संचित घाटा 4,985 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उनके अनुसार कई उपक्रमों की नेटवर्थ भी पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
जुर्माने से लेकर दवाइयों और मनरेगा तक के मामलों का जिक्र
संजय शर्मा ने प्रशासनिक व्यवस्था में कथित लापरवाही के कई मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तंबाकू उत्पादों से वसूले गए 5.57 करोड़ रुपये के जुर्माने को सरकारी खाते में जमा नहीं करवाया गया। इसके अलावा पशु अस्पतालों में एक्सपायरी दवाइयों के इस्तेमाल और मनरेगा में बिना हस्ताक्षर भुगतान जैसे मामलों का भी उन्होंने जिक्र किया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कैग की रिपोर्ट प्रदेश की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने राज्य सरकार से कैग की सिफारिशों पर तत्काल अमल करने, नए कर्ज पर नियंत्रण लगाने और राजस्व लीकेज व कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
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