होटल ब्लिस और होटल क्लार्क्स इन में कारीगरों के उत्पादों की बिक्री शुरू, टूलकिट, ऋण और कौशल प्रशिक्षण के साथ मार्केटिंग पर जोर
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से देशभर के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल विकास, आधुनिक टूलकिट, ऋण सुविधा और बाजार से जोड़ने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश के उद्योग विभाग ने पालमपुर में कारीगरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने के लिए नई पहल शुरू की है।
हिमाचल प्रदेश में पीएम विश्वकर्मा योजना के नोडल विभाग उद्योग विभाग की ओर से पालमपुर स्थित होटल ब्लिस और होटल क्लार्क्स इन में पीएम विश्वकर्मा कारीगरों के उत्पादों की बिक्री एवं प्रदर्शन के लिए समर्पित स्टॉल और आउटलेट स्थापित किए गए हैं।
इन स्टॉल का शुभारंभ एमएसएमई मंत्रालय के सहायक निदेशक अशोक कुमार गौतम और जिला उद्योग केंद्र कांगड़ा के महाप्रबंधक ओम प्रकाश जरियाल ने किया। इस अवसर पर होटल ब्लिस पालमपुर की प्रबंध निदेशक सीमा शर्मा तथा पीएम विश्वकर्मा योजना, हिमाचल प्रदेश की एसएलपीएमयू टीम और उद्योग विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
पर्यटकों और ग्राहकों तक सीधे पहुंचेंगे कारीगर
इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों के उत्पादों को उपयुक्त और अधिक फुटफॉल वाले बाजार स्थलों तक पहुंचाना है। होटल परिसरों, पर्यटन केंद्रों और अन्य प्रमुख स्थानों पर बिक्री सुविधाएं उपलब्ध करवाकर कारीगरों को सीधे ग्राहकों, पर्यटकों और आगंतुकों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
एमएसएमई मंत्रालय के सहायक निदेशक अशोक कुमार गौतम ने बताया कि हिमाचल में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने के लिए यह नया प्रयास शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत पात्र विश्वकर्माओं को टूलकिट के लिए 15 हजार रुपये तथा एक से तीन लाख रुपये तक ऋण सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके साथ ही मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि होटल ब्लिस पालमपुर में विश्वकर्माओं के उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए स्टॉल उपलब्ध करवाए गए हैं। इसी कड़ी में पालमपुर के होटल एयोटल में भी आउटलेट शुरू किया जा रहा है। इस पहल के सफल रहने पर इसे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार देने की योजना है।
इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भी मिलेगा अवसर
अशोक कुमार गौतम ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़े कारीगरों को इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भाग लेने का अवसर भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन विश्वकर्माओं का उद्यम रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, लेकिन वे उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं, उन्हें भी मेले में भागीदारी की अनुमति दी गई है।
उन्होंने कारीगरों से अधिक से अधिक आवेदन करने का आह्वान किया। उनके अनुसार पोर्टल प्रत्येक माह 1 से 20 तारीख तक खुला रहेगा और आवेदकों को प्राथमिकता के आधार पर अवसर दिया जाएगा। इससे कारीगरों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीण कारीगरों को बाजार से जोड़ने पर जोर
जिला उद्योग केंद्र कांगड़ा के महाप्रबंधक ओम प्रकाश जरियाल ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक कारीगरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पर्यटन स्थलों के प्रमुख होटलों में उत्पादों को प्रदर्शित करने के साथ उनकी बिक्री की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत पात्र कारीगरों के लिए एक से तीन लाख रुपये तक ऋण, 15 हजार रुपये की टूलकिट और कौशल प्रशिक्षण के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन स्टाइपेंड का प्रावधान है। इससे पारंपरिक कारीगरों की आजीविका और रोजगार को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
होटल ने कारीगरों को निशुल्क उपलब्ध करवाया स्थान
होटल ब्लिस पालमपुर की प्रबंध निदेशक सीमा शर्मा ने बताया कि होटल की ओर से स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए निशुल्क स्थान उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों में काम कर रहे कारीगरों को प्रोत्साहित करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि हिमाचल प्रदेश में होटल उद्योग और अन्य संस्थान भी आगे आकर पारंपरिक कारीगरों को इसी तरह सहयोग देंगे। इस पहल से स्थानीय हुनर को पहचान मिलने के साथ कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है।
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