पहाड़ी चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाया, नव भारत साक्षरता अभियान से शेष निरक्षरों को भी जोड़ा जा रहा
हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में लंबा सफर तय करते हुए 2025 में पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल किया। वर्ष 1951 में प्रदेश की साक्षरता दर महज 7.98 प्रतिशत थी। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम क्षेत्रों और सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने के लगातार प्रयासों ने हिमाचल को साक्षरता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
समय के साथ प्रदेश में स्कूलों और कॉलेजों की संख्या बढ़ी और शिक्षा को सरकारों की प्राथमिकता में शामिल किया गया। इसका असर साक्षरता दर पर भी लगातार देखने को मिला। वर्ष 1961 में प्रदेश की साक्षरता दर 21.30 प्रतिशत, 1971 में 31.96 प्रतिशत और 1981 में 42.48 प्रतिशत तक पहुंची।
वर्ष 1991 में साक्षरता दर बढ़कर 63.54 प्रतिशत हो गई, जबकि 2001 में यह 76.05 प्रतिशत और 2011 में 82.80 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद भी उन लोगों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयास जारी रहे, जो किसी कारणवश पढ़ाई-लिखाई से दूर रह गए थे।
साक्षरता अभियानों ने निभाई अहम भूमिका
वर्ष 2017 में साक्षर भारत योजना के तहत प्रदेश में करीब 67,500 लोगों को साक्षर बनाया गया। इसके बाद पढ़ना-लिखना अभियान के माध्यम से वर्ष 2022 तक करीब एक लाख लोगों को अक्षरों की दुनिया से जोड़ा गया।
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ‘उल्लास’ के तहत भी निरक्षर लोगों की पहचान कर उन्हें पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित किया गया। वर्ष 2024 में प्रदेश में 95,307 निरक्षरों की पहचान की गई। इसके बाद उल्लास कार्यक्रम के माध्यम से इन्हें साक्षर बनाने की दिशा में काम किया गया।
इन लगातार प्रयासों का परिणाम रहा कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में 99.5 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ पूर्ण साक्षर राज्य बनने के मुकाम तक पहुंचा। शेष लोगों को भी साक्षर बनाने का कार्य नव भारत साक्षरता अभियान के तहत जारी है।
दिल्ली में देश के सामने रखी उपलब्धि की कहानी
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित उल्लास मेले में हिमाचल प्रदेश ने अपनी साक्षरता उपलब्धि की कहानी देश के सामने रखी। शिक्षा विभाग की ओर से इसके लिए विशेष प्रस्तुति तैयार की गई, जिसमें प्रदेश के साक्षरता अभियान और इस सफर में हासिल की गई उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।
साक्षरता दर में ऐसे आया बदलाव
वर्ष साक्षरता दर19517.98%196121.30%197131.96%198142.48%199163.54%200176.05%201182.80%202599.5%
अक्षर लिखना परीक्षा में पास होने से कम नहीं: सावित्री देवी
बिलासपुर की 60 वर्षीय सावित्री देवी के लिए पढ़ना-लिखना सीखना किसी परीक्षा में पास होने से कम नहीं है। वह बताती हैं कि उल्लास कार्यक्रम के माध्यम से पढ़ना-लिखना सीखने के बाद अब वह अपने जरूरी पढ़ाई-लिखाई से जुड़े काम खुद कर सकती हैं।
इसी तरह 58 वर्षीय निर्मला देवी और संध्या देवी के लिए भी साक्षरता का यह सफर बेहद खास रहा। साक्षर बनने के बाद उन्हें पहली बार राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला और यह सफर उन्हें अपने गांव से दिल्ली तक ले आया।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सरकार का जोर
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास का आधार है। सरकारों के लगातार प्रयासों से हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षर बनने का गौरव हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अब शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है।
हिमाचल की साक्षरता यात्रा यह दर्शाती है कि लंबे समय तक किए गए छोटे-छोटे प्रयास किस तरह बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों ने प्रदेश को साक्षरता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दिलाई है।
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