मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार ने कहा- छात्रों की आवाज को समय पर नहीं सुना गया, केंद्र को लेनी चाहिए थी जिम्मेदारी
नीट पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर हिमाचल प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके कारण यह आंदोलन देशभर में फैल गया।
नरेश चौहान ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले से बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए और कई छात्रों ने गंभीर कदम उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्र व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को शुरुआत में ही अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए थी और नैतिक आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए थी।
प्रधान मीडिया सलाहकार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मामले में जिम्मेदारी लेने में देरी की, जिसके चलते देशभर में छात्रों का आक्रोश बढ़ा।
उन्होंने कहा कि यदि शुरुआत में ही उचित कदम उठाए जाते तो स्थिति इतनीनरेश चौहान ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मुद्दे को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों और युवाओं की आवाज गंभीर नहीं होती।
सोनम वांगचुक मामले को लेकर भी उठाए सवाल
नरेश चौहान ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मुद्दे को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के साथ किए गए व्यवहार पर भाजपा को जवाब देना चाहिए।
हिमाचल में पेपर लीक को लेकर सरकार का दावा
नरेश चौहान ने हिमाचल सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के दौरान कोई पेपर लीक नहीं हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय पेपर लीक के मामले सामने आए थे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने पहले की तुलना में अधिक रोजगार उपलब्ध करवाए हैं।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube