शिमला:
हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में कृषि और बागवानी उपज विपणन समितियों (APMC) को और अधिक सुदृढ़ तथा प्रभावी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश सरकार ने इन समितियों के अध्यक्षों के मासिक मानदेय को 24 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 60 हजार रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
इसके साथ ही, समितियों के गैर-सरकारी सदस्यों को भी अब प्रति बैठक 3,000 रुपये का भत्ता देने का प्रावधान किया गया है। कृषि विभाग के इस फैसले से प्रदेश में कार्यरत कुल आठ समितियों के अध्यक्षों और लगभग 60 गैर-सरकारी सदस्यों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस बड़े बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए कृषि विभाग ने 'हिमाचल प्रदेश कृषि एवं उद्यानिकी उपज विपणन (वित्तीय) नियम, 2006' में संशोधन का एक प्रारंभिक प्रारूप (ड्राफ्ट) जारी कर दिया है।
सरकार ने इस संबंध में पारदर्शिता बरतते हुए आम जनता से अगले 30 दिनों के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। जनसाधारण से मिलने वाले इन सुझावों और आपत्तियों के उचित निपटारे के बाद ही सरकार द्वारा अंतिम अधिसूचना (Final Notification) जारी की जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के इस नीतिगत फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य कृषि मंडी समितियों में जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और भागीदारी को बढ़ाना है। मानदेय और भत्ते में इस बढ़ोतरी से जमीनी स्तर पर काम कर रहे प्रतिनिधियों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे प्रदेश की कृषि उपज विपणन व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत और पारदर्शी बनेगी।
आपको बता दें कि वर्तमान में लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों को छोड़कर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में कुल आठ कृषि मंडी समितियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, जिन्हें इस फैसले से नई ऊर्जा मिलेगी।