सर्दियों में मिलेगी बकाया बिजली, सालाना 600 से 1,000 करोड़ रुपये तक की आय का अनुमान; वाइल्डफ्लावर हॉल, JSW और किशाऊ परियोजना को लेकर भी गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के लंबित बिजली एरियर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने इसे प्रदेश के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत करार दिया है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद हिमाचल को अगले 20 वर्षों में कुल 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने के साथ सालाना करीब 600 से 1,000 करोड़ रुपये तक की आय होने का अनुमान है।
शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान नरेश चौहान ने कहा कि धनतेरस और दिवाली के दौरान आया सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हिमाचल के लिए बड़ी सौगात है। उन्होंने बताया कि बीबीएमबी में प्रदेश की हिस्सेदारी का मामला वर्ष 1996 से अदालत में लंबित था।
वर्ष 2011 में हिमाचल का 7.19 प्रतिशत बिजली शेयर निर्धारित हुआ था, जिसके बाद नियमित हिस्सेदारी मिलनी शुरू हुई, लेकिन पुराने बकाया बिजली एरियर को लेकर प्रदेश की लड़ाई जारी रही।
चौहान के अनुसार, बिजली एरियर के भुगतान के लिए हिमाचल ने 15 वर्षों की अवधि की मांग रखी थी, जबकि पंजाब इसे 30 वर्षों में देने के पक्ष में था। सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता निकालते हुए 20 वर्षों की अवधि तय की। कुल 13,000 मिलियन यूनिट बिजली में से परियोजना निर्माण लागत का समायोजन करने के बाद हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
अक्टूबर से मार्च के बीच मिलेगी बकाया बिजली
नरेश चौहान ने बताया कि प्रदेश सरकार बकाया बिजली को अक्टूबर से मार्च के बीच सर्दियों के महीनों में लेने की योजना बना रही है। इस दौरान हिमाचल में बिजली की मांग अधिक रहती है, जिससे प्रदेश को इसका ज्यादा लाभ मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली ट्रेडिंग के माध्यम से भी आय अर्जित कर रही है। हाल ही में राजस्थान को 15.50 रुपये और केरल को 14.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेची गई है। मौजूदा बाजार दरों के आधार पर बीबीएमबी एरियर से प्रदेश को सालाना करीब 600 से 700 करोड़ रुपये से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक की आय होने का अनुमान है।
किशाऊ बांध को लेकर मुख्यमंत्री की रणनीति का किया जिक्र
मीडिया सलाहकार ने बीबीएमबी मामले में सफलता के पीछे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की रणनीतिक पहल को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना को लेकर बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के समक्ष स्पष्ट किया था कि हिमाचल पेयजल संकट के समाधान के लिए परियोजना में सहयोग करने
को तैयार है, लेकिन बीबीएमबी एरियर मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अनुकूल सहमति दी जानी चाहिए।
चौहान के अनुसार, मुख्यमंत्री की इस पहल से दूसरे राज्यों की सहमति हासिल करने में मदद मिली।
वाइल्डफ्लावर हॉल मामले में 401 करोड़ रुपये की रिकवरी
नरेश चौहान ने प्रदेश के हितों से जुड़े अन्य मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वाइल्डफ्लावर हॉल छराबड़ा का विवाद करीब 23 वर्षों से लंबित था। सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के बाद प्रदेश को 401 करोड़ रुपये का एरियर प्राप्त हुआ और होटल पर हिमाचल का अधिकार सुनिश्चित हुआ।
उन्होंने बताया कि अब होटल को 35 वर्षों के लिए नीलामी के माध्यम से दिया गया है। इससे प्रदेश को सालाना करीब 36 करोड़ रुपये और पूरी अवधि में लगभग 1,200 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।
JSW प्रोजेक्ट से 18 प्रतिशत मुफ्त रॉयल्टी बिजली का अधिकार
चौहान ने कहा कि JSW पावर प्रोजेक्ट के मामले में हाईकोर्ट का फैसला प्रदेश के खिलाफ आने के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इसके बाद हिमाचल के पक्ष में 18 प्रतिशत मुफ्त रॉयल्टी बिजली का अधिकार सुनिश्चित हुआ। उनके मुताबिक, इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 150 से 250 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ मिल रहा है।
किशाऊ परियोजना से बिना वित्तीय बोझ के मिलेगी 221 मेगावाट बिजली
नरेश चौहान ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर भी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा था, जिसमें हिमाचल और उत्तराखंड को परियोजना की लागत का हिस्सा उठाने के साथ बिजली खरीद के लिए भी भुगतान करना पड़ता।
उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग उठाई और कहा कि हिमाचल अपनी जमीन और जल संसाधन उपलब्ध करवा रहा है, इसलिए प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
चौहान के अनुसार, केंद्र सरकार और लाभार्थी राज्यों द्वारा परियोजना की लागत वहन करने की व्यवस्था स्वीकार की गई है। इसके तहत हिमाचल को बिना वित्तीय बोझ के 221 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी। परियोजना शुरू होने के बाद इससे प्रदेश को सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का लाभ होने का अनुमान है।
1966 से लंबित अधिकारों की लड़ाई का किया उल्लेख
नरेश चौहान ने कहा कि बीबीएमबी में हिमाचल की हिस्सेदारी का सवाल वर्ष 1966 से लंबित रहा है। किशाऊ बांध को लेकर हुई वार्ताओं के दौरान दूसरे राज्यों के साथ सहमति बनाने और सुप्रीम कोर्ट में सहमति एफिडेविट प्रस्तुत करवाने की दिशा में भी प्रयास किए गए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल के जल, बिजली और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। बीबीएमबी एरियर, वाइल्डफ्लावर हॉल, JSW पावर प्रोजेक्ट और किशाऊ बांध जैसे मामलों में मिली सफलता से प्रदेश को आर्थिक लाभ मिलने के साथ भविष्य में वित्तीय स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube