नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना, बोले- कांग्रेस रिपीट नहीं, डिफीट होगी; मुख्यमंत्री भी सुरक्षित नहीं, 30 साल के संघर्ष और केंद्र के प्रयासों से मिला हिमाचल को अधिकार
बीबीएमबी की बिजली हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर इस फैसले का श्रेय लेने की होड़ में शामिल होने का आरोप लगाया है।
शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल को यह अधिकार करीब 30 वर्षों के संघर्ष, पूर्ववर्ती सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयासों से मिला है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से 125 यूनिट मुफ्त बिजली की पुरानी व्यवस्था बहाल करने और कांग्रेस की 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की चुनावी गारंटी पूरी करने की मांग उठाई। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के लोगों को 24 घंटे सस्ती बिजली उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि कांग्रेस रिपीट नहीं, बल्कि डिफीट होगी और मुख्यमंत्री भी सुरक्षित नहीं हैं।
30 साल के संघर्ष के बाद मिला हिमाचल को अधिकार
जयराम ठाकुर ने कहा कि बीबीएमबी बिजली हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का 6 नवंबर को आया फैसला हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस फैसले का राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि इसके पीछे करीब तीन दशक का संघर्ष और कई सरकारों के प्रयास शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने हिमाचल के पानी पर रॉयल्टी की मांग उठाई थी। इसके बाद वर्ष 1996 में वीरभद्र सिंह की सरकार के समय मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 27 सितंबर 2011 को प्रेम कुमार धूमल की सरकार के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल की 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी सुनिश्चित की थी।
जयराम ठाकुर ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान 4 जनवरी 2018 को मंत्रिमंडल में डिफरेंशियल एनर्जी की वापसी को लेकर आगे बातचीत करने का निर्णय लिया गया। वर्ष 2019 और 2020 में भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही जारी रही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के महान्यायवादी की मध्यस्थता से कैशलेस सेटलमेंट का रास्ता निकला।
अगले 20 वर्षों में मिलेगी 11,973 मिलियन यूनिट बिजली
जयराम ठाकुर के अनुसार, पूंजीगत देनदारी के समायोजन के बाद हिमाचल को अगले 20 वर्षों में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। इसमें सर्दियों के छह महीनों के दौरान हर साल करीब 598 मिलियन यूनिट बिजली प्रदेश को उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि यह हिमाचल के लिए बड़ी राहत है और इसका लाभ प्रदेश की जनता तक पहुंचना चाहिए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री सुक्खू से सवाल किया कि इस फैसले में उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि क्या है? जयराम ने कहा कि फैसले का श्रेय लेने की होड़ बंद होनी चाहिए, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया, पूर्ववर्ती सरकारों के प्रयासों और केंद्र सरकार की भूमिका का परिणाम है।
125 यूनिट मुफ्त बिजली बहाल करे सरकार, 300 यूनिट की गारंटी का क्या हुआ?
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था और कांग्रेस की चुनावी गारंटियों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने मांग की कि सरकार 125 यूनिट मुफ्त बिजली की पुरानी व्यवस्था बहाल करे और प्रदेशवासियों को 24 घंटे सस्ती बिजली उपलब्ध करवाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि कांग्रेस की 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की गारंटी का क्या हुआ? क्या सरकार इस गारंटी को पूरा करेगी? जयराम ठाकुर ने बिजली शुल्क और सेस में बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उद्योगों और ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली कटौती से राहत मिलनी चाहिए।
कर्मचारियों के डीए और एरियर को लेकर भी सरकार पर निशाना
जयराम ठाकुर ने आत्मनिर्भर हिमाचल के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के कर्मचारी डीए, एरियर और मेडिकल बिलों के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सरकार लगातार कर्ज ले रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र और उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। उनके अनुसार, प्रदेश में बेरोजगारों को रोजगार के बजाय केवल गारंटियां दी गई हैं और गरीबों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।
बोले- कांग्रेस रिपीट नहीं, डिफीट होगी; मुख्यमंत्री भी सुरक्षित नहीं
कांग्रेस सरकार के भविष्य को लेकर जयराम ठाकुर ने कहा कि झूठी घोषणाओं और दूसरों के प्रयासों का श्रेय लेकर जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार रिपीट नहीं, बल्कि डिफीट होगी। उन्होंने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री भी सुरक्षित नहीं हैं।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में हिमाचल में चौतरफा तबाही हुई है और सरकार भी आपदा से कम नहीं रही। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सरकार से चार वर्षों के कामकाज का हिसाब मांगेगी और सरकार को अपनी घोषणाओं तथा चुनावी गारंटियों पर जवाब देना होगा।
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