धर्मशाला:
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल पर्यटन निगम (HPTDC) के आठ प्रमुख होटलों को लीज पर देने के फैसले के बाद पर्यटन कर्मियों में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश है। इस फैसले से निगम के होटलों में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिसके चलते उनके माथे पर चिंताओं की लकीरें साफ देखी जा रही हैं।
सरकार के इस कदम के खिलाफ अपनी नाराजगी जताने के लिए आज प्रदेश भर से पर्यटन निगम के कर्मचारी धर्मशाला में एकजुट हुए।
कर्मचारियों ने धर्मशाला की सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और अपने हक के लिए आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को प्रदेश के इन आठ चालू होटलों को निजी हाथों या लीज पर बिल्कुल नहीं देना चाहिए, क्योंकि ये होटल मुनाफे में हैं और हिमाचल प्रदेश की कमाई व राजस्व में अहम योगदान दे रहे हैं।
कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि वे सरकारी संपत्तियों को इस तरह लीज पर देने के फैसले को कतई स्वीकार नहीं करेंगे।
एक तरफ रोजगार का वादा, दूसरी तरफ बेरोजगारी को बुलावा
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कार्यकारी अध्यक्ष शशि शर्मा ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पर्यटन निगम के होटलों को लीज पर देने का फैसला पूरी तरह से गलत है।
एक तरफ तो प्रदेश सरकार युवाओं को पांच लाख नौकरियां देने का बड़ा दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मुनाफे में चल रहे इन होटलों को लीज पर देकर कर्मचारियों को बेरोजगारी के दलदल में धकेलने का काम कर रही है। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हिमाचल पर्यटन निगम के प्रबंधक को एक ज्ञापन भी सौंपा है, ताकि इन होटलों को निजी हाथों में जाने से समय रहते रोका जा सके।