मंडी:
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए निगम प्रबंधन ने यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक पुख्ता इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं।
हड़ताल के दौरान बसों का संचालन सुचारू रखने के लिए मंडी डिपो के तहत तात्कालिक आधार पर ड्राइवरों की भर्ती प्रक्रिया दोपहर 12 बजे से आरंभ कर दी गई। इन पदों पर भर्ती होने वाले ड्राइवरों को 1500 रुपये प्रति दिन के हिसाब से दिहाड़ी दी जाएगी।
देर शाम इसकी सूचना सार्वजनिक होने के बाद सुबह से ही क्षेत्रीय डिपो कार्यालय के बाहर नौकरी की चाह रखने वाले बेरोजगार युवाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
कंडक्टरों की जगह तैनात होंगे होमगार्ड, कागज की पुरानी टिकटों से होगा काम
हड़ताल के दौरान कंडक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए परिवहन निगम ने होमगार्ड कमांडेंट से करीब 117 होमगार्ड जवानों की मांग की है। ये होमगार्ड आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से टिकट नहीं काटेंगे, बल्कि पुरानी व्यवस्था के तहत कागज की पर्ची वाली टिकटों का इस्तेमाल करेंगे,
जिन्हें पंच करने की भी आवश्यकता नहीं होगी। निगम के अधिकारी इन सभी होमगार्ड्स को केवल स्थानीय (लोकल) रूटों पर चलने वाली बसों में तैनात करके भेजेंगे।
25 पदों के लिए पहुंचे सैकड़ों युवा, स्थायी भर्ती न होने पर जताया रोष
मंडी में कुल 25 पदों के लिए दोपहर 12 बजे तक ही 150 से अधिक आवेदन जमा हो चुके थे, जबकि एक बजे तक यह संख्या सैकड़ों पार कर गई। दोपहर 1 बजे के बाद सभी आवेदकों का ड्राइविंग ट्रायल शुरू किया गया, जिसके तुरंत बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
ज्ञात हो कि पूरे मंडी मंडल में कुल 140 पद भरे जाने हैं। इस दौरान भर्ती के लिए पहुंचे 200 से अधिक युवाओं में इस बात को लेकर गहरा रोष भी देखा गया कि सरकार उन्हें दिहाड़ी पर रखने के बजाय स्थायी तौर पर नियुक्तियां दे। युवाओं ने बताया कि उन्होंने पहले भी भर्ती परीक्षा पास की थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था।
लॉन्ग रूट की बसें रहेंगी ठप, वोल्वो के संचालन पर संशय
हड़ताल के कारण लॉन्ग रूट (लंबी दूरी) पर जाने वाली एचआरटीसी की बसें पूरी तरह से ठप रहेंगी। इससे निपटने के लिए निगम प्रबंधन बॉर्डर क्षेत्रों में चलने वाली निजी बसों, सीटीयू (CTU) और पंजाब रोडवेज के अधिकारियों से लगातार बातचीत कर रहा है, ताकि बॉर्डर एरिया से ये बसें सवारियों को गंतव्य तक पहुंचा सकें।
वहीं, यदि हड़ताल होती है तो मनाली से चलने वाली सरकारी वोल्वो बसों के पहिये भी थम जाएंगे, जिसका सीधा नुकसान सैलानियों को उठाना पड़ेगा और उन्हें यात्रा के लिए निजी वोल्वो बसों का सहारा लेना होगा।