शिमला।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लग सकता है। प्रदेश में जारी पंचायत और शहरी निकाय चुनाव की प्रक्रिया के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर 6200 शिक्षकों की भर्ती के लिए चल रही काउंसलिंग प्रक्रिया को स्थगित करने का सुझाव दिया है।
आयोग का तर्क है कि चुनाव में शिक्षकों की बड़े स्तर पर ड्यूटी लगी है, जिससे काउंसलिंग प्रक्रिया में बाधा आ सकती है।
काउंसलिंग केंद्रों और चुनावी व्यवस्था में टकराव
शिक्षा विभाग ने सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध प्रदेश के 145 स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिमला के प्रमुख स्कूलों—लालपानी, छोटा शिमला, पोर्टमोर, फागली, समरहिल और संजौली आदि में काउंसलिंग केंद्र बनाए हैं।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि काउंसलिंग की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है, जिससे न केवल प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ेगा बल्कि वर्तमान में जारी चुनावी कार्यक्रम की तैयारियों में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों पर फंसा पेंच
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को इसी महीने काउंसलिंग की सभी औपचारिकताएं पूरी कर शिक्षकों को स्कूलों में तैनात करने के कड़े निर्देश दिए थे। विभाग ने भर्ती के लिए 9 केंद्र और 10 विशेष कमेटियां भी गठित कर ली थीं।
5 और 6 मई को प्रधानाचार्यों की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी और विभाग ने 20 मई तक पूरी प्रक्रिया खत्म करने की डेडलाइन तय की थी, लेकिन अब आयोग के हस्तक्षेप के बाद इन नियुक्तियों में देरी होना तय माना जा रहा है।
इन श्रेणियों के पदों पर होनी है नियुक्तियां
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रवक्ता (Lecturer), टीजीटी (TGT), सीएंडवी (C&V), डीपीई (DPE), पीईटी (PET) और जेबीटी (JBT) सहित विभिन्न श्रेणियों के लगभग 6200 शिक्षकों की नियुक्ति होनी है।
विभाग ने काउंसलिंग के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन आयोग ने वर्तमान परिस्थितियों और स्टाफ की कमी को देखते हुए इसे कुछ दिनों के लिए टालने को कहा है। अब विभाग इस मामले को दोबारा सरकार के समक्ष ले गया है ताकि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके।