शिमला।
जिला शिमला पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ एक बड़ा और सुनियोजित अभियान चलाते हुए अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। रोहड़ू और कोटखाई में दर्ज एनडीपीएस मामलों की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और चंडीगढ़ तक फैली 'चिट्टा' सप्लाई चेन का पर्दाफाश किया है।
शिमला के एएसपी (हेडक्वार्टर) अभिषेक ने प्रेस वार्ता में बताया कि पुलिस अब केवल छोटे पेडलरों तक सीमित न रहकर तकनीकी जांच और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए मुख्य सप्लायरों (Kingpins) को उनके ठिकानों से दबोच रही है।
रोहड़ू मामले में यूपी और पंजाब से हुई गिरफ्तारियां
एएसपी अभिषेक के अनुसार, रोहड़ू पुलिस ने मार्च महीने में 53 ग्राम चिट्टा बरामदगी के मामले में बैकवर्ड लिंकेज खंगालते हुए पाया कि स्थानीय तस्कर उत्तर प्रदेश के सलमान हैदर के माध्यम से नशा मंगवाते थे।
पुलिस ने बिजनौर (UP) में दबिश देकर सलमान को गिरफ्तार किया। पूछताछ और बैंक खातों की जांच में पंजाब के थोमस मसीह का नाम सामने आया। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने पंजाब के गुरदासपुर (बटाला) से मुख्य सप्लायर थोमस मसीह को भी गिरफ्तार कर लिया है, जो इस पूरी चेन का अहम हिस्सा था।
कोटखाई केस: पिस्टल और 'आइस' के साथ चंडीगढ़ का सप्लायर दबोचा
इसी तरह कोटखाई पुलिस ने एक अन्य मामले में कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़ के दड़ूमाजरा से मुख्य सप्लायर गोलू को गिरफ्तार किया है। गौरतलब है कि कोटखाई में पकड़े गए आरोपियों के पास से न केवल चिट्टा, बल्कि खतरनाक ड्रग Meth Crystal (Ice) और पिस्टल भी बरामद हुए थे।
पकड़े गए तस्करों ने खुलासा किया कि उन्हें नशे की खेप चंडीगढ़ से सप्लाई की जा रही थी। पुलिस ने कॉल डेटा और आर्थिक लेन-देन को ट्रेस करते हुए मुख्य आरोपी को चंडीगढ़ से धर दबोचा।
2026 में बदला पुलिस का तरीका: आंकड़ों में बड़ी सफलता
जिला शिमला पुलिस ने वर्ष 2026 में जांच की गुणवत्ता में बड़ा सुधार किया है। एएसपी ने बताया कि इस वर्ष अब तक बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर 33 बड़े तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 2024 में यह संख्या मात्र 4 और 2025 में 7 थी।
पुलिस अब नशे के 'सोर्स' तक पहुँच रही है। इसी के साथ अब तक कुल 25 बड़े नशा तस्करी नेटवर्कों को ध्वस्त किया जा चुका है, जो पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केरल जैसे राज्यों तक सक्रिय थे।
नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
शिमला पुलिस का कहना है कि नशा तस्करों के नेटवर्क को पूरी तरह डिस्मेंटल करने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। एएसपी ने स्पष्ट किया कि इंटर-स्टेट पुलिसिंग और डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से तस्करों की पूरी सप्लाई चेन को तोड़ा जा रहा है ताकि भविष्य में नशे की आपूर्ति को पूरी तरह ठप किया जा सके।
पुलिस का यह विशेष अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा, जिसमें आर्थिक लेन-देन की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।