सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मुख्यमंत्री ने बताया प्रदेश के अधिकारों की जीत, बोले- हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति से टूटा 15 साल पुराना गतिरोध; बिजली बेचकर 1000 करोड़ रुपये तक राजस्व जुटाने का लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश के बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) एरियर मामले में सुप्रीम कोर्ट से प्रदेश के पक्ष में आए फैसले के बाद जश्न का माहौल है। शिमला पहुंचने पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया।
कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया और उन्हें कंधों पर उठाकर फैसले की खुशी मनाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से प्रदेश को आने वाले 15 से 20 वर्षों में 15 से 20 हजार करोड़ रुपये तक का आर्थिक लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस सफलता का श्रेय अपनी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार किए गए प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल के पक्ष में फैसला होने के बावजूद पिछले करीब 15 वर्षों से प्रदेश को उसका अधिकार नहीं मिल पा रहा था।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल के पक्ष में फैसला आ चुका था तो उसके क्रियान्वयन में इतनी देरी क्यों हुई। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इसके पीछे कहीं न कहीं राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी रही।
मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी एरियर मामले और किशाऊ बांध समझौते के बीच हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किशाऊ बांध समझौते से पहले 16 दिसंबर को उनकी ओर से एक पत्र भेजा गया था।
इसमें स्पष्ट किया गया था कि हिमाचल प्रदेश किशाऊ बांध समझौते पर तभी आगे बढ़ेगा, जब हरियाणा सरकार पिछले 15 वर्षों से लंबित बीबीएमबी एरियर मामले में हिमाचल के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल करेगी। इसके लिए केंद्र सरकार से भी हरियाणा को तैयार करवाने की अपेक्षा की गई थी।
सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने यह शर्त रखी और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे नहीं बढ़ती तो इस मामले को सुलझाने में अभी 20 साल और लग सकते थे।
बीबीएमबी की बिजली से 1000 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीबीएमबी से मिलने वाली बिजली हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का बड़ा माध्यम बन सकती है। सरकार की प्राथमिकता इस बिजली का अधिकतम मूल्य हासिल करना है।
उन्होंने बताया कि यदि बिजली 6 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेची जाती है तो प्रदेश को करीब 500 करोड़ रुपये की आय हो सकती है। हालांकि, सरकार इससे अधिक राजस्व जुटाने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, हिमाचल ने तमिलनाडु को 13.50 रुपये, केरल को 14.50 रुपये और राजस्थान को 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेची है। ऐसे में सरकार की कोशिश बीबीएमबी से मिलने वाली बिजली के लिए भी बेहतर दर हासिल करने की है। यदि बिजली का औसत मूल्य करीब 10 रुपये प्रति यूनिट मिलता है तो प्रदेश को 1000 करोड़ रुपये से अधिक की आय हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का लाभ अंततः आम उपभोक्ताओं और हिमाचल प्रदेश की करीब 75 लाख जनता को मिलेगा।
15 से 20 साल में 15 से 20 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान
मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी फैसले के दीर्घकालिक आर्थिक महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने 11,973 मिलियन यूनिट बिजली का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि प्रदेश को इसका उचित मूल्य मिलता है तो अगले 15 से 20 वर्षों में हिमाचल को 15 से 20 हजार करोड़ रुपये तक का लाभ हो सकता है।
सुक्खू ने कहा कि इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी। इसका सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचेगा। उन्होंने इस फैसले को हिमाचल के अधिकारों के लिए लंबे समय से जारी संघर्ष का परिणाम बताया।
वहीं, राजनीतिक सवालों पर मुख्यमंत्री ने दीपावली का हवाला देते हुए फिलहाल भाजपा को जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने विपक्ष को भी दीपावली की शुभकामनाएं दीं और बीबीएमबी एरियर मामले में मिली सफलता पर समस्त हिमाचलवासियों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति या सरकार की नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की है और इसका लाभ प्रदेश की जनता को मिलना चाहिए।
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